रायबरेली(हि. स.)। गंभीर अपराधों में बंद कैदी अब जेल से लोगों की थालियों में स्वाद परोस रहे हैं। यहां से पैदा की गई आलू और सब्जियों की भारी मांग हो रही है और इसे प्रदेश के अन्य जेलों में मांग के अनुरूप भेजा जा रहा है। खास बात है कि जेल में पैदा की जा रही है सब्जियां पोषणयुक्त होती हैं और इनमें जैविक खाद का ही उपयोग किया जाता है। दरअसल जिला जेल में 32 एकड़ में खेती की जा रही है, जिसमें फसल लहलहाने का काम 60 बंदी कर रहे हैं। विभिन्न अपराधों में सज़ायाफ्ता कैदी अब अपनी पिछली जिंदगी को पीछे छोड़ते हुए मेहनत के साथ खेतों में पसीना बहा रहे हैं और आलू, सब्जी की पैदावार कर रहे हैं।
जिला जेल में 32 एकड़ कृषि योग्य भूमि है। जिस पर सब्जी और आलू की पैदावार की जाती है। सबसे अधिक 16 एकड़ में आलू की फसल पैदा होती है। जेल के खेतों में ख्याति 3797, 3711, कुफरी ब्रांड की आलू पैदा होती है। पिछले साल 845 क्विंटल आलू की पैदावार हुई थी। इस साल भी आलू की बोआई की गई। इसके लिए 50 क्विंटल एफआई बीज मंगाया गया है।जिला जेल में पैदा होने वाली आलू कानपुर देहात, लखनऊ और अंबेडकरनगर की जेलों में जाती है। आलू की पैदावार होने के बाद उसे हाईटेक व्यवस्था के जरिए कोल्ड स्टोरेज में पहुंचाया जाता है।
जिला जेल में गेहूं की आधुनिक प्रजाति को लेकर शोध भी हो रहा है,इसके लिए बीज विकास निगम ने जिला जेल से अनुबंध किया हुआ है।
इसके अलावा जिला जेल में बंदी अपने हाथों से थाली का स्वाद बढ़ाने वाली सब्जी का उत्पादन करते हैं। लौकी, खीरा, तोरई, शिमला मिर्च समेत वैरायटीदार सब्जी की पैदावार होती है। खास बात यह है कि खेती में बहुत जरूरत पड़ने पर यूरिया का उपयोग होता है। अधिकतर जैविक खाद और गोबर से फसल का पोषण किया जाता है।
जिला कारागार के जेलर सत्य प्रकाश ने बताया कि जिला जेल में बंदी आलू की सबसे अधिक खेती करते हैं। बाहर से मांग आने पर आलू की आपूर्ति होती है और हर वर्ष खेती का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। खेती में उन बंदियों को लगाया गया है जिनकी इच्छा खेती करने की है।
जेल अधीक्षक अविनाश गौतम ने बताया कि जेल में केवल बंदी सजा नहीं काटते हैं, बल्कि अपने जीवन का सुधार भी करते हैं।
