Sunday, February 15, 2026
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जिगर डे के मौके पर मुस्लिम मुसाफ़िर ख़ाने में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन

गोंडा रात बज़्मे असग़र व जिगर गोंडा की जानिब से शह्र के मुसाफ़िर ख़ाने के हॉल में एक शानदार ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन आलमी शोहरत याफ़्ता शाइर वासिफ फ़ारूक़ी की सदारत व मुजीब सिद्दीक़ी की निज़ामत में किया गया। जिस मुशायरे की सरपरस्ती बुज़ुर्ग शायर जमील आज़मी ने की।
मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद गोंडा की चेयरपर्सन उज़्मा राशिद ने जिगर और गोंडा के शीर्षक पर अपने विभिन विचार रखे। मेहमाने एज़ाज़ी मुश्फिक अहमद खान रहे। सदारती ख़ुत्बे में वासिफ फ़ारूक़ी ने गोंडा के साहित्य से जुड़ी कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा कि गोंडा वो शह्र है जिसे जिगर ने मुरादाबाद को छोड़कर अपना घर बनाया और यहीं के होकर रह गए। मुशायरे को एक नया वक़ार बख्शने वाले शाइर जिगर मुरादाबादी ही हैं।

बज़्म के सद्र डॉ सय्यद राशिद इक़बाल ने सभी मेहमानों का इस्तक़बाल करते हुए बज़्म की अदबी खिदमात में शिरकत करने की गुजारिश भी की। मुशायरे के पहले दौर में सभी मेहमानों और शायरों का माल्यार्पण हुवा तथा शॉल और मोमेंटो भेट दिया गया। मुशायरे का आग़ाज़ हर्षित मिश्रा लखनवी और वक़ार हरचन्दवी की नाते पाक से हुवा।

मुशायरे में पढ़े गए कुछ ख़ास शेर-

उरूसे शेरो सुख़न को हया यहाँ से मिली
वकारे इल्मो अदब को बक़ा यहाँ से मिली
ये शहरे असग़रो हैरत, ये है दयारे ग़ज़ल
जिगर को दर्दे जिगर की दवा यहाँ से मिली
वासिफ़ फ़ारूक़ी लखनऊ

अदालत का भरम रखने की ख़ातिर
लिए मीज़ान इक मूरत खड़ी है
जमील आज़मी

किसी को लोग समझते हैं लाटरी का टिकट
किसी को पेट के अंदर हलाक करते हैं
उस्मान मीनाई बाराबंकी

वो चाहते थे कि सरहद पे काम आएँ मगर
शहीद हो गए गलियों में इस सदी के चराग़
शाहिद जमाल फैज़ाबाद

ईंट बुनियाद की रखते हुए सोचा था कहाँ
घर को तक़सीम कई टुकड़ों में करना होगा
डॉ बलवंत सिंह गोरखपुर

वो पत्थर दिल पिघलता जा रहा है प्यार से मेरे
हुआ मेरी दुआओं में असर आहिस्ता आहिस्ता
वसीम रामपुरी

तुम्हारे अंदाज़ हैं निराले ये मालो दौलत ये तर निवाले
कभी अकेले में ग़ौर करना हराम क्या है हलाल क्या है
सलीम ताबिश लखनऊ

भर ही जाता है कभी सब्र का पैमाना भी
हर कोई हज़रते अय्यूब नहीं होता है
अफ़रोज़ तालिब तुलसीपुर

ज़ुल्मत के दौर की ये कहानी भी जान लो
मातम था मेरे घर कहीं शहनाई हो गई
कमाल बदायूनी

इनके अलावा रश्मि देहलवी, फ़ारूक़ आदिल लखनऊ, अफ़सर हसन, आतिफ़ गोंडवी, सुरेंद्र झंझट, वक़ार काशिफ़ बाराबंकी, अज़्म गोंडवी, क़ासिम गोंडवी, अभिश्रेष्ठ तिवारी, अरबाज़ ईमानी, अभिषेक श्रीवास्तव, अल्हाज गोंडवी, मुजीब अहमद, आकिफ़ खोचड़, प्रेम गोंडवी, सूफ़ी गोंडवी वग़ैरा ने भी अपने कलाम पेश किए।

इस मौके पर दीनानाथ त्रिपाठी, नदीम सिद्दीकी, राजेश दीक्षित, जावेद पप्पू, विजय श्रीवास्तव, लुत्फी कमाल, विनोद श्रीवास्तव, डॉ विक्की, शेख शम्स, इरफान मोईन, बाबू इस्राईल, फहीम सिद्दीक़ी, जमशेद वारसी, शबाहत हुसैन, मास्टर अदील, खुर्शीद अजहरी, हाजी शुऐबुद्दीन, मतीन सिद्दीक़ी, अब्दुल्लाह, सोनू, सीटू, इमरान, आफताब तन्हा, मो इसराईल, मनोज मिश्रा, अफ़ज़ल खान, अभिषेक मिश्रा, अब्दुल्लाह अंसारी, आज़म अली, रहमान, मोहसिन, मल्लू, आरिफ रोशन, उज़ैर, नसीम, उसैद, रिज़वान ठेकेदार, जुनैद अली वग़ैरा ख़ास तौर से मौजूद रहे।

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