-प्रथम किश्त 957 लाख रुपये जारी, परती भूमि में सुधार की उम्मीद
लखनऊ (हि.स.)। मिट्टी में सुधार व विकास के साथ ही जल संरक्षण पर सरकार 1914 लाख रुपये खर्च करेगी। इससे पहले से चल रहे भूमि सुधार के काम में और गति आने की उम्मीद है। इसके साथ ही जल संरक्षण के काम में भी तेजी आएगी। इसके लिए पहली किश्त 957 लाख रुपये जारी कर दिया गया है।
प्रदेश सरकार के अमर चंद्र द्वारा कृषि अनुभाग पांच को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम को पूर्व में संचालित सोडिक लैंड रिक्लेमेशन तृतीय परियोजना के लिए तीन किश्तों पर प्रथम किश्त 957 लाख रुपये राज्यपाल की अनुमति से दी जा रही है। इस बजट को भूमि सुधार और विकास के काम में लगाया जाना है। इसके तहत मृदा संरक्षण व जल संरक्षण के कामों में वृद्धि की जाएगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24.11 लाख हेक्टेयर भूमि समस्याग्रस्त है अर्थात उसमें खेती नहीं की जा सकती। इसमें खेती के लिए कृषि के लिए अयोग्य भूमि 4.42 लाख हेक्टेयर, कृष्य बेकार भूमि 3.88 लाख हेक्टेयर, परती भूमि 15.81 लाख हेक्टेयर है। इस बजट से समस्याग्रस्त भूमि में सुधार के साथ ही जल व मृदा संरक्षण में काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही मृदा परिक्षण व पोषक तत्वों की कमी को दूर करने का भी प्रयास किया जाएगा।
सरकार ने पहले से ही पांच साल में 43 हजार 850 हेक्टेयर खराब भूमि को कृषि योग्य बनाने का फैसला किया है। इसका शासनादेश सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह में जारी हुआ था। इसका फैसला प्रदेश में हर वर्ष कृषि योग्य हजारों हेक्टेयर भूमि शहरीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे व डिफेंस कॉरिडोर आदि में चले जाने के कारण घट रही कृषि योग्य भूमि की भरपाई करने के लिए लिया गया था। अब नये बजट से प्रदेश सरकार के कृषि कार्य में और गति आने की उम्मीद है।
उपेन्द्र
