Friday, April 3, 2026
Homeउत्तर प्रदेशजलाने की जगह मिट्टी पर मिलाओ पुआल, एक टन में मिलेगा 400...

जलाने की जगह मिट्टी पर मिलाओ पुआल, एक टन में मिलेगा 400 किग्रा जैविक पदार्थ : डॉ डीआर सिंह

कानपुर (हि.स.)। धान की फसल पककर खेतों में खड़ी है और कटाई के साथ मड़ाई का भी कार्य किसान भाई तेजी से कर रहे हैं। लेकिन देखा जा रहा है कि किसान भाई धान के पुआल को लेकर परेशान हैं और कई जगहों पर पुआल को जलाने की भी खबरें आ रही है। ऐसे में किसान भाइयों को चाहिये कि पुआल को जलाने की जगह मिट्टी में मिलाने की ओर सोचना चाहिये। एक टन पुआल को अगर मिट्टी में मिलाया गया तो 400 किग्रा जैविक पदार्थ मिलेगा। यह बातें सीएसए के कुलपति डा. डीआर सिंह ने कही।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे धान की फसल अवशेषों को खेत में न जलाएं क्योंकि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती है। उन्होंने बताया कि एक टन पुआल को मिट्टी में मिलाने से 5.5 किलोग्राम नत्रजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश, 1.2 किलोग्राम सल्फर तथा 400 किलोग्राम जैविक पदार्थ सहित अन्य पोषक तत्व मिट्टी में मिल जाते हैं। फल स्वरुप मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है और अगली फसल लेने में फसल लागत कम आती है। जबकि फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ने के कारण मृदा में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु, केंचुआ आदि मर जाते हैं। इसके अतिरिक्त जैविक कार्बन जो पहले से ही मिट्टी में कम है जलकर नष्ट हो जाता है। फलत: जमीन बंजर एवं अनुउत्पादक हो जाती है। साथ ही वातावरण दूषित हो जाता है। तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

कुलपति डॉक्टर डीआर सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि वे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा विकसित एक जैव अपघटक ‘पूसा डी कंपोजर’ फसल के अवशेषों को 15 से 20 दिनों में खाद में बदल देता है इस डी कंपोजर में 20 रुपये की लागत वाले 4 कैप्सूल का एक पैकेट होता है। जो धान की भूसे के घटकों पर कार्य करने की क्षमता रखने वाले एंजाइम का उत्पादन करता है। सक्रीय कवक के साथ पुआल 15 से 20 दिनों में विघटित हो जाता है व खाद बन जाती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular