लखनऊ (हि.स.)। तीन राज्यों में कांग्रेस को ऐसा झटका लगा है कि उसे संभलने में समय लगेगा। यह कांग्रेस के लिए वैसे ही है, जैसे भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के समय में गुड फील करती रह गयी और हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद लगातार दो बार कांग्रेस की केंद्र में सरकार में रही। तेलंगाना विजय ने कांग्रेस को सांस लेने का मौका दिया है। इस चुनाव का आगे इंडिया गठबंधन पर भी पड़ेगा और क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस पर हावी होने का प्रयास करेंगी।
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि छत्तीसगढ़ में तो भाजपा भी विश्वास नहीं कर रही थी कि वह जीतेगी, लेकिन जनता ने जिता दिया। भाजपा की इस जीत से कई तरह के बदलाव आएंगे। अब समाजवादी पार्टी जैसी क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस पर हावी होंगी। इससे गठबंधन का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव से भाजपा कार्यकर्ताओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ ही अमित शाह पर भी विश्वास काफी बढ़ा है। उनकी रणनीति काम कर गयी और जो भाजपा को भी नहीं अनुमान था, वह तीन राज्यों में हो गया। इससे भाजपाइयों को खुश होना लाजिमी है। अब प्रदेश में भी केंद्र की ज्यादा चलेगी और उनके अनुसार ही यहां रणनीति बनेगी।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर पांडेय का कहना है कि इससे उप्र में भी भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ जाएगा और आने वाले लोकसभा के चुनाव में इसका असर दिखेगा। निश्चय ही इससे दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा।
मऊ के जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज राय का कहना है कि लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर विश्वास जताया है। यह गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति की जीत है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के सांगठनिक सुदृढता की विजय है। भाजपा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती है।
उपेन्द्र/बृजनंदन
