– चुनार किले की बनावट और पत्थर पर उकेरी गई आकृतियों को देख पर्यटकों ने कहा-वाह
मीरजापुर (हि.स.)। गंगा की लहरों पर पर्यटन के नए आयाम स्थापित करने वाले फाइव स्टार सुविधाओं से युक्त क्रूज एमवी राजमहल बुधवार को चुनार पहुंचा। राजसी वैभव वाले इस दोमंजिला क्रूज पर सवार होकर चुनार पहुंचे 13 ब्रिटिश, तीन जर्मन व दो भारतीय पर्यटकों ने चुनार किले के तिलिस्म को देखा। चुनार किले की सैर करने के साथ यहां के वैभवशाली इतिहास और यहां राज करने वाले देशी-विदेशी शासकों के बारे में जानकारी हासिल की। पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक चुनार किले को देखने के बाद चुनार डाक बंगला से गंगा को निहार कर विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध दिखे। पर्यटकों के दल ने चुनार के पॉटरी कला को भी देखा। साथ ही दरगाह में कालीन एवं दरी बुनकरों के यहां जाकर उनके हुनर की जानकारी हासिल की।
पर्यटन दल के सदस्यों ने चुनार दुर्ग पहुंचकर चुनार किला व सोनवा मंडप की प्रस्तर कला के दीदार किए और गाइड से उसके बारे में जानकारी ली। विदेशी मेहमानों ने उत्साह के साथ सोनवा मंडप की प्रस्तर कला को यादगार के रूप में अपने कैमरे में कैद किया। इसके समीप स्थित योगिराज भतृहरि की समाधि के दर्शन किए। पर्यटन किला स्थित बावली और उसकी बनावट व आकार के बारे में चर्चा करते रहे। पर्यटक दल डाक बंगले के अवलोकन के बाद किले के दक्षिणी ओर स्थित अंग्रेजों के कब्रिस्तान को भी देखा। यहां पर अपने पुरखों की कब्रों को देखने के बाद उसके बारे में गाइड से विस्तार से जाना। इसके बाद दल के सदस्यों ने दरगाह शरीफ मुहल्ले में होने वाली दरी और कार्पेट की बुनाई देखी।
गिरजा शंकर
