कोलंबो (हि.स.)। चीन के विदेश मंत्री वांग यी रविवार को मालदीव से कोलंबो पहुंचे, जहां उन्होंने श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से मुलाकात कर पर्यटन और निवेश पर चर्चा की है। इससे पहले दोनों देशों में जहरीले जैविक उर्वरकों की खरीद को लेकर तनाव बढ़ गया था। इस उर्वरक को श्रीलंका के लेने से मना करने पर चीन ने उसे काली सूची में डाल दिया था।
श्रीलंका और चीन के द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों के 65 साल पूरे होने पर दो दिनों की यात्रा पर पहुंचे वांग यी श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। श्रीलंकाई पीएम राजपक्षे से मुलाकात के दौरान उन्होंने श्रीलंका में और अधिक निवेश करने का वादा भी किया। पहले से ही चीन ने श्रीलंका में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
मुलाकात के बाद पीएम महिंदा राजपक्षे ने ट्वीट कर कहा कि चीन के विदेश मंत्री के साथ सुखद मुलाकात हुई। चर्चा श्रीलंका के मेडिकल विद्यार्थियों के चीन लौटने के वास्ते जरूरी व्यवस्था करने पर केंद्रित रही। हमने पर्यटन, निवेश, कोविड -19 से राहत एवं कोविड बाद की स्थिति के लिए तैयारी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
श्रीलंका के विदेश सचिव जयंत कोलंबागे के अनुसार चीनी विदेश मंत्री वांग इस यात्रा के दौरान श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे एवं विदेश मंत्री जी एल पेइरिस से भी मिलेंगे।
कोलंबागे ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री की इस यात्रा के दौरान नये चीनी निवेश पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
श्रीलंका पर दुनियाभर के देशों का कुल 55 अरब डॉलर का कर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार, यह धनराशि श्रीलंका की कुल जीडीपी की 80 फीसदी है। इसमें सबसे अधिक कर्ज चीन और और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का है। जबकि इसके बाद जापान और विश्व बैंक का स्थान है। भारत ने श्रीलंका की जीडीपी का 2 फीसदी कर्ज दिया है।
महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका और चीन के बीच नजदीकियां खूब बढ़ी। श्रीलंका ने विकास के नाम पर चीन से खूब कर्ज लिया। लेकिन, जब उसे चुकाने की बारी आई तो श्रीलंका के पास कुछ भी नहीं बचा। जिसके बाद हंबनटोटा पोर्ट और 15,000 एकड़ जगह एक इंडस्ट्रियल जोन के लिए चीन को सौंपना पड़ा। अब आशंका जताई जा रही है कि हिंद महासागर में अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए चीन इसे बतौर नेवल बेस भी प्रयोग कर सकता है।
अजीत तिवारी
