नई दिल्ली | अफगानिस्तान में चीनी राजदूत वांग यू और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य ऑपरेशनल कमांडर मुफ्ती अब्दुल रऊफ अजहर ने गुरुवार को कंधार में तालिबान नेतृत्व से मुलाकात की और सुन्नी पश्तून इस्लामवादियों यानी तालिबानियों को अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए बधाई दी। मुल्ला बिरादर को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में तालिबान की ओर से प्रबल दावेदार माना जा रहा है। एक ओर जहां चीनी राजदूत वांग ने बुधवार को अपने पाकिस्तानी समकक्ष से अफगान मुद्दे पर हर संभव सहयोग करने के लिए मुलाकात की, वहीं माना जा रहा है कि उन्होंने तालिबान शासित अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में बीजिंग की ओर से मदद की पेशकश करने के लिए कंधार में मुल्ला बरादर से भी मुलाकात की थी। यहां ध्यान देने वाली बात है कि चीन न केवल तालिबान के हाथों अमेरिका के अपमान से खुश है, बल्कि वह तालिबान राज में अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के नाम पर बेल्ट रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को पूरा करना चाहता है। साथ ही चीन की नजर अफगानिस्तान में लीथियम, कॉपर और ऐसे दुर्लभ खनिजों के अकूत भंडार पर है। भारतीय आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञों के अनुसार, काबुल में तालिबान के उदय के साथ जैश और अधिक सक्रिय हो जाएगा और पूरे दक्षिण एशिया में इस्लामी कट्टरपंथ में बढ़ावा होगा। इतना ही नहीं, अफगान में तालिबान राज से चीन को भी फायदा मिलता दिख रहा है। तालिबान की मदद से ड्रैगन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत पर दबाव बनाए रखेगा और पड़ोस में भारत के विरोधियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करेगा। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तालिबान के उदय का भारत की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा।
