Thursday, February 12, 2026
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चित्रकूट : डकैत जियालाल कोल को सजा, ददुआ के भाई और बेटे की बढ़ी मुश्किलें

– विवेचक की जांच में आरोपित हैं पूर्व सांसद बालकुमार पटेल और पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल

चित्रकूट (हि.स.)। दस्यु शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के सहयोगी डकैत जियालाल कोल को कोर्ट ने अपहरण और हत्या के मामले में सात साल की सजा सुनाई है। उसी मामले में ददुआ के भाई पूर्व सांसद बालकुमार पटेल और बेटे पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल भी आरोपित हैं। विवेचक की जांच रिपोर्ट में इन दोनों पर आरोप तय हुए हैं। ऐसे में जियालाल की सजा के बाद पूर्व सांसद और पूर्व विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सनत कुमार मिश्रा ने बताया कि मारे गये डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ गैंग के सदस्य जियालाल कोल को विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट ने सात साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। बताया कि जिस मामले में कोर्ट ने जियालाल को सजा सुनाई है उसमें ददुआ के भाई पूर्व सांसद बालकुमार पटेल और बेटा पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल भी आरोपित है। इन पर आरोप विवेचक अभय प्रताप मल्ल की जांच रिपोर्ट पर तय हुआ है। बताया कि 15 सितंबर 2007 में रैपुरा थाना में विवेचक ने लिखित सूचना दी थी कि उनके द्वारा अपहरण व हत्या के एक मामले की विवेचना की जा रही है।

आरोप से यह हुए बाहर

शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि विवेचक की जांच रिपोर्ट में शंकर कोल, जिलालाल कोल, गुड्डा कोल, महेश कुमार पटेल, सोनू पटेल, कुलदीप, रामनारायण उर्फ सेठ, सरवन पटेल, सुलखान सिंह, वीर सिंह पटेल, बाल कुमार पटेल, मुन्ना सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह, रमाशंकर पटेल उर्फ नेता, रामलाल पटेल उर्फ आचार्य, राजूकोल, गिरजाशंकर मुंशी, सूरजभान पटेल, सुबेदार सिंह उर्फ राधे, रघुनंदन पाठक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हुए हैं। सभी घटना में शामिल पाए गए हैं। यह लोग ददुआ गैंग के सदस्य हैं और ददुआ के मारे जाने के बाद कमान बेटा वीर सिंह संभाल रहा है। उन्होंने बताया कि दो अक्टूबर 2008 को विवेचक ने सभी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय ने 22 नवंबर 2008 को संज्ञान में लिया। इसके बाद कुलदीप, गिरजाशंकर, सूरजभान, रमाशंकर सिंह, अरुण कुमार, रामलाल पटेल, सरवन, रामनारायण, सोनू पटेल, सुलखान सिंह, रघुनंदन व महेश की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश पारित किया और जिलालाल कोल, गुड्डा कोल और शंकर कोल से पृथक कर दिया।

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