औरैया (हि.स.)। संसार में चिड़ियों का भी एक अनोखा संसार सभी जानते हैं कि दुनिया में तरह-तरह की अनोखी अनोखी अद्भुत और अचंभित करने वाली रंग बिरंगी तरह-तरह की कलाओं में निपुण कम दूरी से लेकर लाखों किलोमीटर की दूरी को नापने वालीं चाहे जल के किनारे हो चाहे जंगल के किनारे हो या जमीन पर हो इन चिड़ियाओं का भी अनूठा संसार होता हैं जिनको देखने में आश्चर्यजनक होना लाजमी है।
ऐसी ही एक चिड़िया जिसको अलग-अलग देशों में अलग- अलग नामों से जाना जाता है। इनमें निगल, मार्टिस, हिरंडिंनिडे, चम्पावत, गोत्याली आदि शामिल हैं।
यह चिड़िया गर्मी का संकेत देती है
जनपद के पंचनद इलाके के जुहीखा पुल पर इनका सैलाब देखने को मिल रहा है , गर्मी का मौसम आते ही यह चिड़िया मैदानों को छोड़कर पर्वतीय क्षेत्रों में प्रवास करती है इससे यह बता देती है कि मैदानी क्षेत्रों में गर्मी शुरू हो गई है। यह चिड़िया अंटार्कटिका महाद्वीप को छोड़ सभी महाद्वीपों में पाई जाती है और यह लंबी दूरी की पुरवा सी चिड़िया है।
इसके विपरीत पश्चिम और दक्षिण अफ्रीकी निगल गैर प्रवासी है, गोत्यालाी हवा में उड़ने वाली कीट पतंगों का शिकार करने में माहिर होती है। नर चिड़िया की पूंछ मादा की तुलना में अधिक लम्बी होती है और गर्मी शुरू होते ही यह चिड़िया पर्वतीय क्षेत्रों में प्रजनन के लिए प्रवास कर जाती है। पर्वती क्षेत्रों में यह लोगों के घरों में भी मिट्टी के घोसले बनाकर फरवरी से मार्च के बीच में अंडे देती हैं। कुशल व्यवहार में निपुण अच्छे स्वभाव की यह चिड़िया धनी मानी जाती है। सामान्य तौर पर नर गोत्याली भोसले के स्थान को चिंता है और फिर गीत और उड़ान के माध्यम से एक मादा को आकर्षित करता है। क्षेत्र के अनुसार इनके घोसले का आकार परिजात के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है अंडों से बाहर आने के बाद बच्चों का लालन-पालन दोनों करते हैं।
जिस घर और प्रतिष्ठान में यह चिड़िया अपना घर बनाती है उसके पास धन-धान्य भाव की कोई कमी कभी नहीं होती है। यह किसी के ही हाथ का कुछ नहीं खाती है। इस कारण से इसे चिड़ियों में पंडित भी कहा और माना जाता है। लोग इसके इंतजार में हमेशा रहते हैं कि कब उनके घर में कोतवाली चिड़िया अपना हौसला बनाए क्योंकि इसके घर में रहने से एक फायदा और है यही कि यह घर के सारे कीट, पतंग, मक्खी, मच्छर आदि को भी खा कर खत्म कर देती हैं।
