मऊ (हि.स.)।सपा नेता दारा सिंह चौहान का विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने और भाजपा का दामन थामने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा घोसी विधानसभा के उपचुनाव के नामांकन, मतदान व मतगणना की तारीखों की घोषणा होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। टिकट के दावेदार अपने-अपने राजनैतिक पंहुच व जातीय गुणा गणित के आधार के अलावा विकास के मुद्दे, स्थायित्व जनप्रतिनिधि की बात कर अपने-अपने दल से टिकट मांग रहे हैं।
घोसी की सियासत का सिरमौर कौन बनेगा। फिलहाल टिकट को लेकर सभी दलों के नेताओं की टकटकी के साध धुकधुकी बनी हुई है। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, आप के नेता लखनऊ के साथ-साथ दिल्ली के सम्पर्क में हैं। नामांकन पत्रों की बिक्री को लेकर प्रशासन मुस्तैदी से तैयारी कर चुकी है। बृहस्पतिवार से बिक्री चालू है लेकिन धरातल पर अभी तक किसी भी दल की तरफ से कोई प्रत्याशी घोषित नहीं है।
सपा और घोसी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामने वाले दारा सिंह चौहान क्या उपचुनाव में घोसी विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी बनेंगे। यह चर्चा के दौर में है लेकिन हकीकत से दूर है। सूत्रों की मानें तो दारा सिंह चौहान का चुनाव लड़ना तय है। वहीं अगर दारा कोई बड़ी राजनीति की महत्वाकांक्षा तथा गृहमंत्री अमित शाह की अगली रणनीति के हिस्से में उपचुनाव से प्रत्याशी बनने से स्वयं की दूरी बनाते हैं तो घोसी विधानसभा से भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा, यह और दिलचस्प हो जाएगा। भाजपा के पास चेहरे, मोहरे और नित्य नए प्रयोग की कोई कमी नहीं है।
सपा के पास नेता के रूप में एक मजबूत चेहरा सुधाकर सिंह का है, इसके अलावा जातीय समीकरण में चेहरों की भरमार है। बसपा घोसी में हमेशा मजबूती से लड़ी है वे भाजपा व सपा के समीकरण को एक पल में कोई भी प्रत्याशी उतारकर बिगाड़ सकती है लेकिन वह मैदान में ही उतरेगी या नहीं, इस विषय पर मौन है। कांग्रेस जीत-हार में तो नहीं रहेगी लेकिन अगर पूजा राय पर विश्वास जताया तो कांग्रेस के वोट बढ़ेंगे और अन्य दलों के वोट में सेंध लगना तय है।
घोसी विधानसभा के उपचुनाव में भले ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है लेकिन किस दल का कौन प्रत्याशी होगा, यह अभी सिर्फ चर्चा का विषय है। चट्टी-चौराहे की दुकानों पर लोग अपने-अपने तरीके से प्रत्याशियों का मूल्यांकन कर रहे हैं और उन्हें उम्मीदवार के रूप में घोषित कर रहे हैं। लोग जीत-हार का समीकरण बना और बिगाड़ रहे हैं लेकिन जीत-हार तो बाद की बात है पहले दल अपने प्रत्याशी तो तय करें। जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा तब तक घोसी उपचुनाव का सिरमौर कौन बनेगा, यह बता पाना या इसका अंदाज लगा पाना मुश्किल है।
आनंद/सियाराम
