संवाददाता
बहराइच। नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम (नाको) के तहत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई के द्वारा एक दिवसीय एड्स व सिफ़लिस जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए एक दिवसीय स्टाफ नर्स व एएनएम के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में एड्स व सिफ़लिस जैसी बीमारियों की पहचान कर माँ व उसके होने वाले शिशु को सुरक्षित करना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि समय से एड्स व सिफ़लिस जैसी बीमारियों की जानकारी होने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ योगिता जैन ने बताया कि टीबी व एचआईवी दोनों में ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण रोगी की मृत्यु तक हो सकती है। इसके लिए समय रहते यदि बीमारी का पता लगा लिया जाय तो इलाज द्वारा जीवन को बचाया जा सकता है। प्रशिक्षण का संचालन करते हुये यूपी टीएसयू के जिला परिवार नियोजन विशेषज्ञ रामबरन यादव ने सभी प्रतिभागियों को बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं की शत प्रतिशत जांच अवश्य की जाय जिससे एड्स व सिफ़लिस जैसी घातक बीमारियों का इलाज समय से किया जा सके। उन्होने इसके लिए लोगों को जागरूक करने की बात भी कही। इसी के साथ आईसीटीसी केंद्र पयागपुर के एलटी अशोक मिश्रा ने किट के माध्यम से एड्स व सिफ़लिस जांच का डेमो भी प्रस्तुत किया। इस मौके पर एसीएमओ डॉ अनिल कुमार, एसीएमओ डॉ विष्णु देव, प्रशासनिक अधिकारी केएन उपाध्याय, प्रीति सक्सेना आदि उपस्थित रहे। सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किया गया।
