फिशिंग कैट के बच्चों का वन विभाग ने किया दावा
लखीमपुर खीरी (हि.स.)। थाना निघासन के लखहा गांव में गन्ने के खेत में बाघिन के बच्चे होने की सूचना रविवार को वन विभाग के अधिकारियों तक पहुंची। आनन-फानन में वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे जांच की तो पता चला कि वे बाघिन के नहीं, फिशिंग कैट के बच्चे थे।
बाघ और बाघिन के हमलों के कारण कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं ,ऐसे में ग्रामीणों में खासी दहशत है और उसी क्षेत्र में गन्ने के खेत में बाघ के बच्चों जैसे दिखने वाले बच्चे ग्रामीणों ने देखे। इसके बाद क्षेत्र में बाघिन होने की दहशत फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और इन बच्चों की जांच की।
मामले में दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी संजय पाठक ने बताया कि आतंक का पर्याय बनी बाघ और बाघिन को वन विभाग द्वारा पकड़ लिया गया है । एक को कर्तनियाघाट और दूसरे को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया है। फिलहाल उस क्षेत्र में अब बाघ और बाघिन की कोई सूचना नहीं है। जिन बच्चों को आज निघासन के लखहा गांव के गन्ने के खेत में ग्रामीणों ने देखा है। वह बच्चे बाघिन के नहीं, फिशिंग कैट के हैं ।
ग्रामीणों को कई बार वन विभाग द्वारा हिदायत दी गई है कि किसी भी जानवर के बच्चों को देखकर उनके पास न जाएं, उन्हें छुए नहीं, परंतु लोग अभी भी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं, फोटो खींचते हैं, वीडियो बनाते हैं। ऐसे में जानवर के हमले का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों से सावधान और सचेत रहते हुए वन विभाग के निर्देशों को मानने की अपील की है।
देवनन्दन
