लखनऊ (हि.स.)। गौ माता की पूजा का त्योहार गोपाष्टमी 12 नवम्बर को श्रद्धाभाव से मनाई जाएगी। धर्मग्रंथों के अनुसार इस तिथि में गायों का पूजन किया जाता है। लखनपुरी की गौशालाओं में गायों की पूजन कार्यक्रम होता है।
गोपाष्मी पर गौ माता की पूजा ऐसे करनी चाहिए
धर्मग्रंथों के अनुसार इस तिथि में प्रातःकाल गौओं को स्नान कराना चाहिए, उसके गंध-पुष्प आदि उनका पूजन करना चाहिए। ग्वालों को भी अनेक प्रकार के वस्त्र-अलंकारों से सुज्जितकर पूजन करना चाहिए। गायों को गो ग्रास देना चाहिए। उनकी परिक्रमा कर उनके साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति होती है।
गोपाष्टमी को जब गाय चरकर वापस आएं तो उनका पूजन करना चाहिए। हरा चारा खिलाना चाहिए। उनकी चरण रज लेकर अपने मस्तक पर लगाना चाहिए। कहा जाता है कि इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है।
लखनपुरी में चौक और मलिहाबाद की गौशाओं में गायों के पूजन का कार्यक्रम होता है। पूजन के अलावा गो-पालकों को पुरस्कृत भी किया जाता है।
पौराणिक आख्यान
पौराणिक आख्यान है कि गायों की सेवा और रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम गोविंद भी पड़ा। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने गोप-गोपियों और गायों की रक्षा के लिए गोवर्धन पहाड़ को अपनी ऊंगली पर उठा रखा था, इस कारण उनका एक नाम गोविंद भी पड़ा। आठवें दिन इंद्र की आंख खुली और उन्होंने अंहकार रहित होकर भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आए। कामधेनु माता ने उनका दुग्ध से अभिषेक किया और भगवान का एक नाम गोविद भी पड़ा।
