Saturday, March 21, 2026
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गौरव से सुनाते हैं आजादी की लड़ाई की दास्तान

– वंदे मातरम् गीत गाने पर विद्यासागर हुए थे गिरफ्तार

– बाल काल से स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता से लेते रहे भाग

मीरजापुर (हि.स.)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विद्यासागर शुक्ल के अंदर आज भी देश भक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी है। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता से भाग लेने वाले श्रीशुक्ल आज भी आजादी के लड़ाई की दास्तान बड़े गौरव से सुनाते हैं। बाल्य काल से ही स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रियता से भाग लेने वाले महुवरिया के विद्यासागर शुक्ल आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

वर्ष 1938-39 में अंग्रेज सरकार के विरूद्ध श्री पुरुषोत्तम मास्टर के साथ घर-घर नोटिस बांटना, विदेशी वस्त्र जलाना, घरों का नंबर मिटाना आदि कार्य स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वर्ष 1940 में स्कूल सुपरिटेंडेंट ब्रह्मदत्त दीक्षित की अध्यक्षता में सोनभद्र के राबर्ट्सगंज के चौराहे पर तिरंगा झंडा फहरा और वंदे मातरम् गीत गाकर लोगों में देश भक्ति के लिए जागृत किया था। पुलिस की मार से उनकी दाढ़ी में चोट लगने से काफी रक्त प्रवाह हुआ। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। 13 अगस्त 1942 को जीत नारायण पांडेय, नरेश चंद्र श्रीवास्तव, पुष्कर पांडेय व विद्यासागर शुक्ल ने पहाड़ा रेलवे स्टेशन को लूटने व जलाने में अहम भूमिका निभाई। आंदोलनकारियों को पुलिस ने वारंट जारी किया। अगस्त 1942 से मार्च 1943 तक करीब आठ माह सहयोगियों संग स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।

राष्ट्रपति के प्रतिनिधि ने किया सम्मानित

राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद ने 98 वर्षीय वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित विद्यासागर शुक्ल को सम्मानित किया। राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में घर जाकर नगर मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह ने भेजे गए शाल,अंगवस्त्रम व कार्ड देकर सम्मानित किया।

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