गोरखपुर में 200 घरों की छतों पर लगे मोबाइल टावर मुसीबत बन गए हैं। निजी संचार कंपनियां इन टावरों का छह माह से न किराया दे रही है न छत से हटा रही हैं। इसको लेकर शहरवासियों ने कई बार कंपनियों को पत्र लिखकर अपने बकाए किराये की मांग की है। इतना नहीं कई लोगों ने कंपनियों से टावर उतारने की भी मांग की है। लेकिन कंपनियों ने उनके पत्राचार का जवाब नहीं दिया। करीब सालभर से ये टावर बंद चल रहे है। इन पर बिजली निगम का भी करीब 30 करोड़ का बिजली बिल बकाया है। बिजली निगम ने इनमें से ज्यादातर के कनेक्शन काट दिए है। कायदे से अबतक कनेक्शन पीडी हो जाने चाहिए।
दरअसल निजी संचार कंपनी रिलायंस और एयरसेल ने अपना मोबाइल सेवा का कारोबार सालों पहले समेट लिया। उपभोक्ता अपना नम्बर पोर्ट कराकर दूसरी कंपनी के उपभोक्ता बन गए। शहरी क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में घरों के छतों पर लगे इन कंपनियों के टावर कुछ दिन तक चले। उसके बाद ये टावर मेंन्टीनेंस के अभाव में बंद हो गए। रिलायंस के ज्यादातर टावरों को जियो ने हैण्डओवर ले लिया। करीब 150 टावर वैसे ही आज भी शहर के विभिन्न मोहल्लों में खड़े है। टावरों की आपरेटिंग सालभर से बंद है। इसी प्रकार एयरसेल ने भी अपनी सेवा बंद होने के बाद टावरों का मेंटीनेंस बंद करा दिया। ऐसे में इसके भी 50 से अधिक टावर बंद हो गए। जिनके छत पर टावर लगे है। वे किराए की आस में टावरों की देखभाल भी कर रहे है।
डेढ़ सौ टावर बंद पड़े हैं
रिलायंस के टावर मेंटीनेंस इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी के कुछ टावर जिओं को हैण्डओवर हो गए। जबकि 150 टावर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बंद पड़े है। कंपनी किराया क्यों नहीं दे रही है। यह तो कंपनी के लोग ही बता पाएंगे। वैसे एक-एक कर इन सभी टावरों को जियो हैण्डओवर ले लेगी।
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