गोरखपुर (हि.स.)। वर्ष 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी डॉ. विपिन टाडा ने मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय पहुंचकर पदभार ग्रहण किया। अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए सम्बंधित अधिकारियों को दिया आवश्यक दिशा निर्देश। उन्होंने कहा कि हर पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलवाने के लिए अच्छी पुलिसिंग की कोशिश होगी।
फरियादियों को न्याय संगत न्याय देना पहला कर्तव्य छोटी से छोटी घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाना पहला उद्देश्य। डॉ. टाडा ने पदभार ग्रहण करने से पहले गोरखनाथ मंदिर पहुच कर गुरु गोरक्षनाथ बाबा का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था को जाना और सम्बंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिया।
मूल रूप से जोधपुर के राजस्थान के रहने वाले विपिन टाडा एमबीबीएस की पढ़ाई की है। पिता मच्छीराम पेशे से वकील हैं। आईपीएस बनने के बाद वह अपने सख़्त रवैए के लिए जाने जाते हैं। अपने काम और ज़िम्मेदारी को लेकर वह ट्रेनिंग के दौरान से ही काफ़ी गम्भीर रहे हैं।
इस वजह से चर्चा में आये
बता दें कि डॉ. विपिन टाडा गोरखपुर आने से पहले बलिया के कप्तान थे। वे रामपुर के भी कप्तान रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने एक व्यापारी को अपहरण कर फिरौती के मामले का महज़ कुछ ही दिनों में खुलासा किया था। इसके बाद उनकी काफ़ी तारीफ़ हुई थी।
हो चुके हैं सम्मानित
डा. विपिन टाडा इनामी बदमाशों को सलाखों के पीछे भेजने वाले सख्त कप्तान के रूप में जाने जाते हैं। इतना ही नहीं, जिले में कानून व्यवस्था कायम रखने के उत्कृष्ट कार्याें के लिए भी ये सम्मानित हो चुके हैं।
नए एसएसपी ने की है चिकित्सकीय पढ़ाई
डॉ. विपिन टाडा ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है। चिकित्सकीय परीक्षा के लिए इन्होंने पूरी लगन से पढ़ाई की। इंटर के बाद एक साल कोचिंग की। पहले प्रयास में वर्ष 2002 में एमबीबीएस के लिए चयनित हो गए। फिर वे राजस्थान के एक गांव में सरकारी अस्पताल में चिकित्साधिकारी बने। आठ महीने तक बतौर चिकित्सक काम किया। इस दौरान इन्हें लगा कि डॉक्टर बनकर चंद मरीजों की सेवा की जा सकती है, लेकिन सिविल सेवा में रहकर बहुत से लोगों की सेवा का अवसर मिलेगा। फिर डॉ. विपिन टाडा ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2011 में भारतीय पुलिस सेवा के लिए उनका चयन हुआ।
साइकिलिंग है शौक
ज्ञातव्य हो कि विपिन टाडा स्पोर्ट्स में भी काफ़ी दिलचस्पी रखते हैं। उन्हें साइकिलिंग का बहुत शौक़ है। तैनाती वाले स्थानों पर वह अक्सर शाम के वक्त में साइकिलिंग करते देखे गए हैं।
