Tuesday, March 31, 2026
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गोंडा- पूस की रात में “हल्कू” बने किसान, गोवंशो से कर रहे फसल रखवाली

प्रदीप पांडेय

गोंडा।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी “पूस की रात” को हम सभी ने बचपन मे पढ़ाई लिखाई के वक्त बड़े ही चाव के साथ पढा था। इस कहानी का चित्रण भी टेलीविजन पर कई बार देखा था। इस कहानी में हल्कू नाम का एक गरीब किसान था, जो पूस की भीषण ठंड में कड़ाके की सर्दी को झेलते हुए अपने फसल की रखवाली खेत मे रहकर पूरी रात करता था। पूस की अंधेरी रात! आकाश में तारे भी ठिठुरते हुए मालूम होते थे। हल्कू अपने खेत के किनारे मचान और अलाव के सहारे अपनी पुरानी व फ़टी चादर ओढ़े और कांपते हुए अपने पालतू कुत्ते के साथ फसल की रखवाली कर रहा था। भीषण ठंड के चलते दो में से एक को भी नींद नही आती थी। लेखक ने इस कहानी में गरीब किसान और ठंड का ऐसा वर्णन किया था की कहानी को पढ़ते और देखते वक्त व्यक्ति खुद को पूस की रात में अपने आपको खेत की रखवाली करने की जगह मौजूद पाता था और उसे उस दौरान ठंड और उससे उत्पन दिक्कत का आभाष होता था।

गोंडा- पूस की रात में "हल्कू" बने किसान, गोवंशो से कर रहे फसल रखवाली

कुछ ऐसा ही नजारा आजकल जिले के इटियाथोक ब्लाक क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। पूस की इस भीषण ठंड में जहां लोग अपने घरों के गर्म रजाई में पूरी रात सोते हुए सुहाने सपने देखते है। वही दूसरी तरफ रात के वक्त सड़को या गांव के रास्तो से होकर आप जब भी गुजरेंगे तो हर तरफ खेतो में तमाम हल्कू आपको देखने को मिलेंगे। ग्रामो के यह हल्कू अपने हाथों में टार्च और लाठी लिए हुए अपनी फसलों की रखवाली करते हुए क्षेत्र में कही भी देखे जा सकते है। सरकार ने भले ही छुट्टा गोवंशों को संरक्षित करने के लिए ब्लाक क्षेत्र में गौशालाओ का निर्माण कराया है, किंतु यह ऊंट के मुह में जीरा साबित हो रहे है। ब्लाक के अधिकारियों की माने तो इन गौशालाओ में क्षमता से अधिक गोवंश संरक्षित है और अब इनमे और जगह नही है। दूसरी तरफ ग्रामो, चौक, चौराहों और सड़कों पर हर दिन छुट्टा गोवंशों की संख्या दिन रात लगातार बढ़ती ही जा रही है, जो किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके है। क्षेत्र में आवारा जानवरों का आतंक है जो किसानों की फसलों को दिन की अपेक्षा रात में अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। कड़ाके की इस ठंड में रातभर जानवरों से किसान जंग लड़ते है और फसलों के बचाव में अपनी जिंदगी दाव पर लगाते है। रात में ठंढी लगने से या छुट्टा जानवरो के हमले से कभी भी उनको अस्पताल जाना पड़ सकता है, फिर भी गांव के यह “हल्कू” खुद को खेतों में जाने से नही रोक पा रहे है। छुट्टा जानवरों से लाही, गेंहू, आलू, मटर, चना आदि फसलों को बचाने के लिए गांव के “हल्कू” कड़ाके की ठंड में रातभर जागकर खेतों की पहरेदारी कर रहे हैं। उनको डर है कि थोड़ी देर के लिए भी वह खेत छोड़कर गए तो यह जानवर उनकी फसलो को चट कर जाएंगे।

ब्लाक क्षेत्र में हर तरफ छुट्टा पशु किसानों के गले की हड्डी साबित हो रहे हैं। इनके आतंक से अन्नदाता परेशान हैं। खेतों में घुसकर छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर दे रहे हैं। ऐसे में किसानों को हाड़ कंपाती ठंड में रातभर जगकर खेतों पर रखवाली करनी पड़ रही है। पेट के भूख की आग के आगे किसानों को हाड़ कंपाने वाली सर्दी में नींद और बिस्तर को छोड़कर फसलों की पहरेदारी करनी पड़ रही है। अनेक किसान रातभर अलाव के सहारे खेतों में डटे रहते हैं। कई जगह परिवार के लोगों की ड्यूटी शिफ्टवार लगानी पड़ रही है। किसानों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में जब कोई व्यक्ति घर से निकलना नहीं चाहता उस वक्त यह लोग आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए खेत में दिन के साथ रात में डटे रहते हैं। कई किसानों ने ठंड से बचने के लिए खेतों में मचान और झोपड़ी बना रखी है, उसमे रहकर फसल की रखवाली करते है। किसानों ने बताया कि हर समय खेतों पर घर का कोई न कोई सदस्य जरूर मौजूद रहता है। ऐसी स्थिति क्षेत्र के लगभग हर गांव की बनी हुई है। छुट्टा मवेशियों की फौज से हर तरफ किसान परेशान है। गोंडा बलरामपुर राजमार्ग समेत इटियाथोक खरगुपुर मार्ग, इटियाथोक बाबागंज मार्ग के साथ ही क्षेत्र के हर मार्ग व गांव के चौक चौराहों पर इन छुट्टा जानवरो को भारी संख्या में कही भी देखा जा सकता है। हर जगह क्षेत्र में भारी संख्या में मौजूद आवारा मवेशी किसानों के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। छुट्टा पशु किसानो के हरे भरे खेतों में तांडव कर रहे हैं, इससे किसानों की फसल तबाह हो रही है। किसानों का कहना है कि वह दिन में खेती का काम करते है और रात में सोने की जगह फसल की रखवाली करके बीमार और परेशान हो रहे है।

खेत मे मौजूद अयाह गांव के किसान बड़कऊ ने कहा कि आस पास आवारा जानवरों का आतंक व्याप्त है। ये जानवर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं हम किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए जानवरों से जंग लड़ रहे हैं। वेदपुर गांव के रामतेज ने कहा कि कड़ाके की ठंड में रात में लोग जब अपने घरों में गर्म कंबलों और रजाइयों में आराम फरमाते हैं। ऐसे में हम लोग खुले आसमान के नीचे हाथ में डंडा लेकर खेतों की पहरेदारी कर रहे हैं। अमारेभरिया गांव के बृद्ध किसान रामशंकर ने कहा कि डर रहता है कि अगर वह लोग थोड़ी देर के लिए भी खेत छोड़कर कही अलग गए तो यह छुट्टा जानवर उनकी फसलो को बर्बाद कर देंगे। ढोंगही गांव के अग्रणी किसान और कांग्रेस नेता शुक्ला प्रसाद शुक्ला का कहना है कि खेतो में लगी फसलो को छुट्टा जानवर पूरी तरह से तहस नहस कर रहे है और जिम्मेदार मौन बने हुए है। इनका कहना है कि जानवरो की पकड़ा पकड़ी और क्षेत्र के गौशाला सब ऊंट के मुह में जीरा साबित हो रहे है और किसानों को सिर्फ बेवकूफ बनाया जा रहा है। अयाह गांव के गुड्डू मिश्रा ने कहा कि हम लोगो द्वारा दिन रात फसल की रखवाली किया जाता है, लेकिन मौका पाते ही खेतों में जानवर घुस जाते हैं और फसल को बर्बाद कर दे रहे हैं। उन्होंने कहा इतनी बड़ी मुसीबत अपने जीवन में कभी नही देखा। अयाह गांव के रघुनाथ मिश्रा ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने का वादा किया था लेकिन यहां तो जो पूंजी खेती में लगाई जा रही है वही वापस नही हो पा रही है। इन्होंने कहा कि रातभर लाठी और टार्च लेकर खेतो की गणेश परिक्रमा रोज करते है। कुल मिलाकर फसल सुरक्षा में किसानों की पूरी रात खेतों पर ही गुजर रही है और वह “हल्कू” बनने को मजबूर है। शासन व प्रशासन को छुट्टा पशुओं से निजात दिलानी चाहिए, जिससे कि किसान इस सर्द मौसम में घर पर रहकर आराम से अपनी नींद पूरी कर सके।

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