Saturday, March 28, 2026
Homeकानपुरगुरु पूर्णिमा पर शिष्यों ने पूजा कर गुरुओं का लिया आशीर्वाद

गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों ने पूजा कर गुरुओं का लिया आशीर्वाद

– गंगा घाटों पर शिष्यों ने किया स्नान, किया दान

कानपुर(हि.स.)। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर कानपुर के विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालु पहुंचकर गंगा स्नान किये। इसके बाद दान किया गया और अपने गुरुओं को पूजा कर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही गुरुओं के सम्मान में विभिन्न मंदिरों में भण्डारा भी आयोजित किये गये। यही नहीं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गंगा घाटों पर मेला भी लगा और प्रशासन के भी पुख्ता इंतजाम रहे।

कानपुर में गुरुपूर्णिमा सोमवार को मनाई जा रही है। सुबह से लेकर दोपहर तक गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। इस पर्व पर शहर के मंदिरों में देव पूजन किया गया, वहीं शिष्यों ने अपने आध्यात्मिक गुरुओं के पास पहुंचकर आशीर्वाद लिया। खासकर गंगा के घाटों पर स्थापित मंदिरों में अधिक भीड़ रही। आनंदेश्वर मंदिर, खेरेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर में भगवान शिव की आराधना कर शिष्यों ने गुरुओं को पूजन कर आशीर्वाद लिया। भक्तों ने श्रीसदगुरु महिमा के भजन गाए , पूज्य संत अजय पुजारी ने आशीर्वाचन में गुरु महिमा का सत्संग सुनाते हुए कहा कहा कि संपूर्ण सृष्टि में केवल सद्गुरु ही हमें सभी कर्म बंधन से मुक्त कर परमात्मा से मिला सकते हैं।

आचार्य रामऔतार पाण्डेय बताते हैं कि संस्कृत में ‘गुरु’ शब्द का अर्थ है ‘अंधकार को मिटाने वाला।’ गुरु साधक के अज्ञान को मिटाता है, ताकि वह अपने भीतर ही सृष्टि के स्रोत को अनुभव कर सके। पारंपरिक रूप से गुरु पूर्णिमा का दिन वह समय है जब साधक गुरु को अपना आभार अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। योग साधना और ध्यान का अभ्यास करने के लिए गुरु पूर्णिमा को विशेष लाभप्रद दिन माना जाता है। यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

जगह जगह हुए भंडारे

सोमवार सुबह सात बजे से ही शहर में भंडारे शुरू हो गए हैं। मंदिरों के आसपास ही भंडारे लगाए गए हैं। इसके अलावा शहर की सड़कों पर जगह-जगह भंडारे के आयोजन किए जा रहे हैं। सड़कों पर भंडारे के साथ स्वच्छता का भी संदेश दिया जा रहा है। प्रसादि ग्रहण करने वालों को दोने व प्लेट डस्टबिन में डालने के लिए कहा जा रहा है।

कृतज्ञता का भाव है गुरु पूर्णिमा

आचार्य श्रीकांत दुबे ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि जिन गुरुओं ने हमें गढ़ने में अपना योगदान दिया है, उनके प्रति हमें कृतज्ञता का भाव बनाए रखना चाहिए और उसे ज़ाहिर करने के दिन के तौर पर ही गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक पूर्णिमा की अवधि दो जुलाई को रात 08ः20 बजे शुरू होगी और तीन जुलाई को शाम 05ः08 बजे समाप्त होगी।

अजय/बृजनंदन

RELATED ARTICLES

Most Popular