-मौदहा बांध निर्माण खंड ने बनाया सात करोड़ का प्लान
-शासन से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य हो जाएगा शुरू
हमीरपुर(हि.स.)। हमीरपुर में यमुना नदी के किनारे स्थित गुप्तकालीन संगमेश्वर मंदिर को सुरक्षा के दायरे में लाए जाने के लिए अब मौदहा बांध निर्माण खंड ने बड़ी तैयारी की है। यमुना नदी की बाढ़ से मंदिर और आसपास के इलाकों के लिए सात करोड़ रुपये की एक परियोजना तैयार कर इसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है। शासन से हरी झंडी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराए जाएंगे।
शहर से करीब पांच किमी दूर मेरापुर में यमुना नदी के तट पर हजारों साल पुराना शिवमंदिर स्थित है। यह मंदिर गुप्तकालीन है, जहां एक ही हिस्से में दो मूर्तियां विराजमान हैं। इन्हें शिव पार्वती के रूप में लोग पूजते हैं। भगवान शिव के इस मंदिर में गुप्तकालीन रामजानकी, लक्ष्मण सहित करीब दो दर्जन मूर्तियां थीं जो किसी जमाने में इधर से उधर हो चुकी हैं। यह मंदिर वास्तुकला का अनूठा उदाहरण है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मंदिर के पास ही चंदन के भी पेड़ हैं। पिछले कई दशक पहले यमुना में बाढ़ के कारण मंदिर में पानी भर गया था। कटान के कारण मंदिर का कुछ जमीनी हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। पिछले साल भी यमुना और बेतवा नदी की बाढ़ के कारण यह हजारों साल पुराना मंदिर क्षतिग्रस्त होते-होते बचा।
मेरापुर के लोग मंदिर को सुरक्षा के दायरे में लाने और नदी के किनारे बसी रिहायशी बस्ती को बचाने के लिए शासन और प्रशासन से मांग कर चुके हैं। विधानसभा के उपचुनाव में लोगों ने इसी मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। ग्रामीणों की भावना को देखते अब मौदहा बांध निर्माण खंड ने मंदिर को यमुना नदी की बाढ़ से बचाने की तैयारी शुरू की है।
मौदहा बांध निर्माण खंड हमीरपुर के अधिशाषी अभियंता टीपी गंगवार ने बताया कि संगमेश्वर मंदिर बहुत प्राचीन है, जिसे सुरक्षा के दायरे में लाया जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सात करोड़ रुपये की परियोजना तैयार कर इसे शासन को भेजी गई है। संगमेश्वर मंदिर यमुना नदी के तट पर स्थित है जहां हर साल बाढ़ के समय कटान होती है। कटान रोकने के लिए यहां साढ़े तीन सौ मीटर लंबी पिचिंग बनाई जाएगी। कई अन्य तकनीकी कार्य भी कराए जाएंगे। इसके अलावा ईश चेतन आश्रम के पास कटान रोकने के लिए 50 मीटर घाट का निर्माण 80 फीसदी हो चुका है। वहीं 400 मीटर लंबी पिचिंग भी बनवाई जा रही है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से परियोजना के कार्य बाढ़ से पहले पूरे कराने की तैयारी है।
पंकज
