Thursday, February 12, 2026
Homeउत्तर प्रदेशगंगा मेला : भैंसों के ठेलों पर रंगों भरे ड्रमों के साथ...

गंगा मेला : भैंसों के ठेलों पर रंगों भरे ड्रमों के साथ हुरियारों की टोलियां, रंगों में सराबोर हुआ कानपुर

— क्रांतिकारियों की पृष्ठभूमि से जुड़ा गंगा मेला पर्व पर हटिया से निकाला ऐतिहासिक जुलूस

— जुलूस में डीएम, कमिश्नर सहित जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों ने शिरकत कर दी बधाई

कानपुर (हि.स.)। देश के उप्र के कानपुर जनपद में होली का पर्व अपनी अनूठी एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के लिए पूरे देश में अपना एक विशेष महत्व रखता है। कानपुर की होली पूरे भारत में अपना अलग स्थान रखती है क्योंकि यहां होली से लेकर गंगा मेला तक रंगों का उल्लास रहता है। इस बार 81वां होली का गंगा मेला आज अनुराधा नक्षत्र में प्राचीन परम्परा के मनाया जा रहा है और आकाश रंगों से सराबोर है।

गंगा मेला आयोजक संरक्षक मूलचंद्र सेठ व संयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया कि इस वर्ष देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है लेकिन कमेटी इस वर्ष होली मेले (गंगा मेला) की 81वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह बढ़े सौभाग्य की बात है। कानपुरवासियों में गंगा मेला की खुशियां रंगों की छठाओं में आज साफ दिख रही है।

गंगा मेला के अवसर पर पुलिस आयुक्त विजय कुमार मीना, जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने अनुराधा नक्षत्र में गंगा मेला की शुरुआत पुलिस बैंड की धुन पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की। पुलिस बैंड की धुन पर जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने ध्वजारोहण करके भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की और रज्जन बाबू पार्क में लगे शिलालेख पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जिलाधिकारी ने कमेटी के सदस्यों को अबीर गुलाल लगाकर ऐतिहासिक गंगा मेला की शुरुआत की। इसके बाद गंगा मेला पर हटिया से रंग का ठेला निकला तो आसमान सतरंगी हो गया।

कानपुर का होली का मेला आजादी के दीवानों की याद में मनाया जाता है। स्वतन्त्रता आन्दोलन चरम सीमा में था। सन् 1942 में ब्रिटिश सरकार के तत्कालीन जिलाधिकारी ने कानपुर में होली खेलने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। हटिया के नव युवकों ने यह तय किया कि यह हमारा धार्मिक त्यौहार है इसे हम पूरे हर्ष उल्लास के साथ मनायेंगे। सन् 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन कानपुर के हटिया में आजादी का झण्डा सन् 1942 की होली में ही हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क में क्षेत्रीय नवयुवक बाबू गुलाब चन्द सेठ के नेतृत्व में इकट्ठा हुए और तिरंगा फहराकर भारत माता की जय…., हम आजाद हैं…., के जयघोष के साथ रंग खेलना प्रारम्भ किया।

इस पर तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के शहर कोतवाल के नेतृत्व में हटिया पार्क को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया और रंग खेल रहे गुलाबचंद, जागेश्वर त्रिवेदी, पं. मुंशीराम शर्मा सोम, रघुबर दयाल, बालकृष्ण शर्मा नवीन, श्यामलाल गुप्त पार्षद, बुद्धूलाल मेहरोत्रा और हामिद खां सहित 43 नव युवकों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया।

इसकी प्रतिक्रिया के प्रति स्वरुप देश की आजादी के लिए पूरे शहर में भयंकर होली खेली गयी और ऐलान किया गया कि जब तक नवयुवक नहीं छोड़े जायेंगे, निरन्तर होली खेली जायेगी। शहर में कई दिनों तक रंग चला। अतः ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और गिरफ्तार नवयुवकों को छोड़ना पड़ा। संयोगवश जिस दिन बन्दी छोड़े गये उस दिन अनुराधा नक्षत्र था, तभी से कानपुर में होली का समापन अनुराधा नक्षत्र के दिन गंगा मेले के रुप में मनाया जाने लगा। उनकी रिहाई के बाद हटिया से रंग का ठेला निकला और लोग होली खेलते हुए सरसैया घाट तक गए, जो आज भी परंपरा के रूप में मनाया जाता है।

महमूद/मोहित

RELATED ARTICLES

Most Popular