मीरजापुर(हि.स.)। गंगा के बढ़ते जलस्तर के चलते कोन ब्लाॅक की लगभग 200 बीघे सब्जी की फसल डूब गई। किसानों को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हो गया। फसल डूबने से सब्जी की लागत भी न निकलने पर आर्थिक रूप से क्षति हुई, इसकी भरपाई किसान कहां से करेंगे, इसके लिए चिंतित हैं।मंगलवार की दोपहर 12 बजे 73.660 मीटर तक जलस्तर पहुुंचने के बाद गंगा स्थिर हो गई। जबकि एक दिन पूर्व तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की दर से बढ़ाव जारी था। अभी भी खतरे के निशान से चार व चेतावनी बिंदु से तीन मीटर पानी नीचे है। फिर भी लोगों को सतर्क रहने के निर्देश प्रशासन ने दिए हैं।
पिछले 15 दिनों से हरिद्वार व यमुना नदी से पानी के आने के कारण लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। लग रहा था कि इस बार अगस्त के पहले सप्ताह में ही पानी चेतावनी बिंदु को पार का जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 16 दिन बाद जलस्तर स्थिर हाे गया। यह देख अधिकारियों ने राहत की सांस ली। तटवर्ती इलाके में रहने वाले लोगों की भी चिंताएं कम हुई। लगातार पानी बढ़ने पर गंगा किनारे खेती करने वाले किसान चिंतित हो गए। उनकी खून पसीने से सींची गई खेती गंगा के पानी में डूब गई।
किसान शिवचंद, रामदास, रामअवतार, अनिल, कैलाश आदि ने बताया कि वह लोग गंगा किनारे लखनपुर, हरसिंगपुर, मझरा, मवैया में परवल, रेक्सहवा कोहड़ा, कद्दू, नेनुआ, ककड़ी आदि की सब्जी की खेती किए हैं। गंगा में लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण दो दिन पूर्व उनकी सब्जी की खेती डूब गई। इससे मुनाफा को कौन कहे, लागत भी डूब गई।
गिरजा शंकर/राजेश
