– मंगलवार सुबह गंगा का जलस्तर 68.30 मीटर पहुंचा, तटवर्ती क्षेत्र में बढ़ रही बेचैनी
वाराणसी(हि.स.)। पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बारिश, बढ़ियाई यमुना नदी के दबाव के कारण वाराणसी में भी उफान मारती गंगा की लहरें चेतावनी बिंदू के समीप पहुंच कर स्थिर हो गई है। लेकिन बाढ़ का खतरा टला नहीं है। गंगा की लहरें एकाध दिन में चेतावनी बिंदू को पार कर तटवर्ती क्षेत्र के बस्तियों में प्रवेश कर सकती है।
केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 68.30 मीटर दर्ज किया गया है। बताया गया कि लहरें स्थिर है। गंगा में चेतावनी बिंदू 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर पर है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के साथ बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों को भी परेशानी हो रही है। गंगा में बढ़ाव के कारण श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार भी बंद कर दिया गया है।
सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन के निर्देश पर जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीम गंगा में चक्रमण कर लोगों को गहरे स्थान पर स्नान न करने की अपील के साथ चेतावनी भी दे रही है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से जिले में बाढ़ जैसे हालात है। वाराणसी जनपद के ग्रामीण अंचल के ढाब क्षेत्रों में गंगा का पानी खेत और खलिहान में पहुंचने लगा है। किसानों को फसल बचाने के साथ पशुओं के चारे की समस्या भी सताने लगी है। उधर, गंगा आरती भी अब ऊंचे स्थानों पर हो रही है। गंगा सेवा निधि की विश्व प्रसिद्ध सायंकालीन गंगा आरती कार्यालय के छत पर हो रही है। सीमित श्रद्धालुओं के बीच गंगा आरती कराई जा रही है।
निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि बहुत तेजी से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है ऐसे में सुरक्षा कारणों से गंगा आरती निधि के कार्यालय के छत पर हो रही है। प्राचीन दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला मंदिर में गंगा प्रवेश के करीब पहुंच चुकी है। मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट का निचला हिस्सा डूब गया है। शवदाह ऊंचे प्लेटफार्म पर हो रहा है। हरिश्चंद्रघाट के भी यहीं हालात है। गंगा में बाढ़ की स्थिति देख नौका संचालन पर पहले से ही सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाया गया है।
श्रीधर/मोहित
