–देश में मिलावट और नकली खाद्य पदार्थ में उत्तर प्रदेश प्रथम
–प्रत्येक जिले व मोहल्लों में हो जांच की सुविधा
प्रयागराज । हर छोटे-बड़े शहर में यदि आप गौर करें तो मरीजों की लाइन एवं प्राइवेट नर्सिंग होम की संख्या बढ़ते ही पाएंगे। सोचने की बात है कि आखिर लोग इतनी बड़ी संख्या में क्यों अस्वस्थ हो रहे हैं ? इसका एक बड़ा कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट का होना है।
यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान मधुबन विहार स्थित रेकी सेंटर पर स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा सेहत के लिए फास्ट फूड ही नहीं, दालें, तेल, दूध और घी जैसे पदार्थ भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। देश में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थ में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। मिलावटखोरी इस देश की गम्भीर समस्या है। थोड़े से धन के लालच में कुछ स्वार्थी तत्व लोगों की जिंदगियों से खेल रहे हैं। ब्रांडेड समान में भी नकल बड़े पैमाने पर हो रही है।
सतीश राय ने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति से ही देश का विकास सम्भव है। तरक्की के साथ देश शक्तिशाली तभी बनता है जब उस देश का हर व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। दुर्भाग्य से नकली और घटिया सामान से बाजार भरा पड़ा है कि इनको जांचना-परखना भी मुश्किल है। नकली खाद्य पदार्थ और केमिकल से बने खाद्य पदार्थों से गम्भीर रोग कैंसर, गैस्टिक, पेचिश, आँत में सूजन, हृदय रोग, लीवर के रोग, लकवा, फेफड़े के रोग, सफेद दाग, एलर्जी की आदि की शिकायतें हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि दालों में खेसारी दाल की मिलावट, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल, बेसन और हल्दी में पीला रंग, बादाम के तेल में मिनरल तेल, चांदी के वर्क में अल्मुनियम वर्क, चाय की पत्ती में रंग, काफी में खजूर इमली के बीज को पीसकर, सत्तू और बेसन में मटर पीसकर मिला रहे हैं। काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज, हींग में मिट्टी, नारियल तेल में खनिज तेल, जीरा में घास के बीज, देसी घी और मक्खन में वनस्पति घी और सेंट, दूध में पानी, स्टार्च, वाशिंग पाउडर, यूरिया यहां तक कि सिंथेटिक दूध ही बना दे रहे हैं और इसी से खोवा-पनीर-दही भी बना रहे हैं। आइसक्रीम में वाशिंग पाउडर, शहद में चीनी और पानी की चाशनी, मेहंदी में केमिकल की मिलावट इससे स्किन की बीमारी हो रही है।
राय ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आशंका जताई है कि भारत में दूध और घी से बने प्रोडक्ट में मिलावट पर लगाम नहीं लगाई गई तो 2025 तक देश की ज्यादातर आबादी कैंसर की चपेट में होगी। सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 में सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। दूध में मिलावट रोकने के लिए धारा 272 एवं 273 के अंतर्गत सीधे कार्रवाई हेतु पुलिस प्रशासन को छूट दी है। इसमें 6 माह की कैद और ₹1000 जुर्माना का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट भी 2016 में केंद्र और राज्य सरकारों को फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट 2006 को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दे चुकी है।
सतीश राय ने कहा कि ज्यादा मात्रा में मिलावट न पकड़े जाने का कारण है । प्रदेश स्तर पर सिर्फ कुछ जगहों पर ही जांच लैब का होना। सभी के लिए जांचना सुलभ नहीं है। खाद्य पदार्थों में मिलावट तभी रुक सकता है जब मान्यता प्राप्त लैब में ही जिले स्तर पर एवं मोहल्ले स्तर पर प्रोफेशनल टेस्ट की सुविधा उपलब्ध हो। इस प्रक्रिया से कोई भी खाद पदार्थों की स्वयं जांच करा सकता है। इसका लाभ एवं परिणाम यह होगा कि 80 प्रतिशत मिलावट अपने आप रुक जाएगी।
विद्या कान्त
