लखनऊ (हि.स.)। चारों तरफ हो रही बारिश ने धान की रोपाई को छोड़कर अन्य खरीफ फसलों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। हर दिन हो रही बारिश के कारण सब्जियों के बीज भी नहीं पड़ पा रहे हैं। इससे खेतों में खरपतवार की समस्या बढ़ गयी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि धान की रोपाई को छोड़कर अन्य खरीफ की खेती का काम कुछ समय के लिए स्थगित रखें तो बेहतर होगा।
उद्यान विभाग के उप निदेशक कौशल कुमार का कहना है कि वर्तमान में धान की रोपाई के लिए अच्छा मौसम है। ऐसे मौसम में खेतों में खर-पतवार ज्यादा हो जाते हैं। चौड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु धान की रोपाई के दो से तीन दिन के अन्दर एनिलोफॉस 30 प्रतिशत ई.सी. या प्रिटालक्लोर 1.50 लीटर प्रति हेक्टेयर को 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर दो से तीन इंच पानी का छिड़काव करें। धान की रोपाई के 15-20 दिन बाद बिस्पाइरीबैक सोडियम 10 एससी 0.20 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में उचित नमी की स्थिति में डालें। यदि धान में खैरा रोग दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए 20-25 किलोग्राम जिंक सल्फेट तथा 2.5 किलोग्राम चूना को 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
जिला उद्यान अधिकारी डा. शैलेंद्र दुबे का कहना है कि मिर्च, बैगन, लौकी आदि सब्जियों के बीज डालने से अभी बचना चाहिए। खेत सुख जाने के बाद एक बार अच्छी जुताई करके ही खरीफ की सब्जियों की बोआई करना चाहिए। इससे निराई-गुड़ाई कम करनी पड़ेगी। खेत में जो सब्जियां हैं, उन कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। इस कारण उन पर नीम का तेल दो मिली लीटर एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के बाद कम से कम आधा घंटा पत्तों पर पानी न पड़े, इसका ध्यान दिया जाना चाहिए।
उपेन्द्र/मोहित
