प्रादेशिक डेस्क
लखनऊ। भड़काऊ भाषण देने के मामले में दोषी करार दिए गए सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर शहर सीट के विधायक मोहम्मद आजम खां की विधानसभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस मामले में गुरुवार को रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने उन्हें 3 वर्ष की सजा सुनाई थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आजम खां को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की सूचना विधानसभा सचिवालय को भेजी थी, जिस पर विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। भड़काऊ भाषण मामले में रामपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए निशांत मान ने सपा महासचिव व रामपुर शहर विधायक आजम खां को गुरुवार को तीन साल कैद व छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। 93 मुकदमों में फंसे आजम को यह पहली सजा है। सजा सुनाने के कुछ देर बाद ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। सजा के एक दिन बाद ही उनकी विधायकी भी चली गई है। सजा के ऐलान के बाद आजम के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। शिकायतकर्ता आकाशदास सक्सेना की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह फैसला लिया। आकाश सक्सेना ने विधानसभा अध्यक्ष के अलावा केन्द्रीय चुनाव आयोग को भी सदस्यता रद्द करने की शिकायत भेजी थी। स्पीकर ने सदस्यता रद्द होने के बाद पद को रिक्त होने की भी सूचना चुनाव आयोग को भेज दी है।
ऐसा है पूरा मामला
इस पूरे वाकए को समझने के लिए आपको चलना होगा साल 2019 में। देश में लोकसभा के चुनाव चल रहे थे। रामपुर में डीएम थे आंजनेय कुमार सिंह। आजम खान की तूती बोलती थी। आलम यह था कि आजम के सामने बोलने की हिम्मत अफसर नहीं जुटा पाते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान डीएम आंजनेय जिला निर्वाचन अधिकारी की भूमिका में थे। इस दौरान आजम खान लगातार उनके ऊपर निशाना साध रहे थे। अफसरों पर हमला बोलते-बोलते आजम शब्दों की मर्यादा तक लांघ गए थे।
जूते साफ कराने तक की कह डाली थी बात
आजम खान ने इस दौरान डीएम से जूते साफ कराने तक की बात भी कह डाली थी। वहीं, डीएम आंजनेय, आजम खान के बयानों पर कानूनी शिकंजा कसते जा रहे थे। एक के बाद एक मुकदमे दर्ज होते गए। आजम खान के बयान किस कदर अपमानजनक थे, इसका अंदाजा उस एफआईआर से लगाया जा सकता है, जिस केस में उन्हें सजा सुनाई गई है। एफआईआर के मुताबिक आजम ने कहा था कि डीएम अंधा हो गया है। इन जैसे कितने डीएम ने मेरे ऑफिस में खड़े-खड़े पेशाब कर दिया है। लोकसभा चुनाव खत्म होते ही आजम के खिलाफ कई केसेज दर्ज किए गए। आईएएस आंजनेय का कहना है कि हमने पूरी तरह से निष्पक्ष चुनाव कराया था। प्रशासन के आरोप कोर्ट में सही साबित हुए।
अभी तो 92 मुकदमों में फैसला बाकी
2019 में आजम पर दर्ज हुए मुकदमों की संख्या 93 थी। अभी सिर्फ एक मामले में फैसला आया है। इस तरह देखा जाए तो अभी 92 केसेज में फैसला आना बाकी है। यह तो हो गई केवल आजम खान की बात। आजम फैमिली के लिए मुसीबतें यहीं खत्म नहीं होने वाली। आजम के अलावा उनकी पत्नी पूर्व एमपी तजीन फात्मा के खिलाफ 34, एमएलए बेटे अब्दुल्ला आजम पर 46 और बड़े बेटे अदीब पर 32 मुकदमे हैं। आजम की बहन निकहत पर भी 30 मुकदमे हैं। इस मुकदमेबाजी में परिवार को काफी समय जेल में गुजारना पड़ा है। पत्नी 10 महीने, बेटा 23 महीना जेल में रहे। वहीं आजम भी लंबे अरसे जेल में रहे हैं।
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जानकी शरण द्विवेदी
