Thursday, February 19, 2026
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कोयला संकट का विद्युत उत्पादन पर असर, एनटीपीसी की एक यूनिट हुई बंद

रायबरेली(हि. स.)। दुनिया के कई देशों में जारी कोयले के संकट का असर विद्युत उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है। हालांकि इससे निबटने के प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन इसी बीच ऊंचाहार एनटीपीसी में पांच सौ मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर छह को बुधवार की दोपहर बन्द कर दिया गया है। जब इस यूनिट को बन्द किया गया, उस समय यह यूनिट 280 मेगावाट के भार पर चल रही थी।

एनटीपीसी की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि एनटीपीसी की सभी यूनिटों की उपलब्धता है। किन्तु मांग कम होने के कारण यूनिट नंबर छह को बंद किया गया है।

एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना ने कोयला भंडारण खत्म होने के बाद पैदा हुई समस्या से निपटने के लिए एनटीपीसी प्रबंधन सक्रिय हुआ है। कोयले की आपूर्ति बढ़ाने और कोयले की गुणवत्ता पूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एनटीपीसी संयंत्र क्षेत्र के सीएचपी ( कोल हैंडलिंग प्लांट ) से जुड़े अधिकारियों के एक दल को झारखंड भेजा गया है। यह दल झारखंड में कोल इंडिया के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर स्थित से निपटने के लिए आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास करेगा। इस समय एनटीपीसी ऊंचाहार में करीब दो हजार मीट्रिक टन कोयला का भंडारण है। जबकि एक दिन में करीब तीस हजार मीट्रिक टन कोयले की खपत है। दूसरी ओर प्रतिदिन आ रही कोयले की आपूर्ति भी काफी कम है। इन्हीं विषयों को लेकर यह टीम झारखंड गई हुई है।

दूसरी तरफ इस समय पूरे देश में कोयले की समस्या है। जिसके कारण निजी क्षेत्र की कंपनियां भी कोयले की किल्लत से जूझ है। और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने झारखंड में कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कैंप कर रखा है। जिसे देखते हुए एनटीपीसी ने भी अपने अधिकारियों को झारखंड के कोयला खदानों पर नजर रखने के लिए भेज दिया है।

इस बीच बरसात होने के कारण कोयले की गुणवत्ता भी काफी घटिया हो गई है। जो कोयला झारखंड से आ रहा है। उसमें न सिर्फ कोयला भीगा हुआ है अपितु कीचड़ भी मिला हुआ है। इस कारण से जब कोयला यूनिट में पहुंचता है तो खराब गुणवत्ता के कारण ब्वायलर को पर्याप्त ताप नहीं दे पाता है। परिणाम स्वरूप कोयला के साथ-साथ आयल भी यूनिट को दिया जा रहा है। जिससे ब्वायलर का तापमान नियंत्रित रहे और बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। झारखंड गए अधिकारियों के दल को कोयले की गुणवत्ता पर भी कोल इंडिया लिमिटेड से समन्वय बनाने की जिम्मेदारी भी है। एनटीपीसी के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इस समस्या से निपट लिया जाएगा।

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