– उप्र कोआपरेटिव बैंक को मिला सेवोत्तम लाइसेंस
– उप्र कोआपरेटिव बैंक सेवोत्तम लाईसेंस प्राप्त करने वाला भारत का पहला बैंक
– सेवोत्तम लाईसेंस प्राप्त होने से उप्र. कोआपरेटिव बैंक की बढेगी साख : राठौर
लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने सोमवार को भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से उप्र कोआपरेटिव बैंक को 23 जून 2023 को IS15700 : 2018 मिले सेवोत्तम लाइसेंस का प्रमाणपत्र यूपी कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक वीके मिश्र को सौंपा। सेवाओं से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए यह लाइसेंस दिया गया है।
इस अवसर पर मंत्री जेपीएस राठौर ने यूपी कोऑपरेटिव बैंक मुख्यालय में नवनिर्मित डीसीबी कैडर अथॉरिटी कार्यालय, डाटा सेंटर, सभागार कक्ष एवं एप्लीकेशन अटेंडेंस ट्रैकिंग सिस्टम और आधार इंबेल्ड पेमेंट सिस्टम का भी शुभारंभ किया है। यह सारी चीजें पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने में मददगार साबित होंगी।
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जेपीएस राठौर ने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा यह लाइसेंस गुणवत्तायुक्त सेवा एवं पारदर्शिता के लिये प्रदान किया जाता है तथा उप्र कोआपरेटिव बैंक सेवोत्तम लाईसेंस प्राप्त करने वाला भारत का प्रथम बैंक है। बैंक को यह लाइसेंस मिलना अत्यंत गर्व की बात है। इसके लिए बैंक के सभी अधिकारी, कर्मचारी बधाई के पात्र हैं।
लाभ में हैं यूपी कोऑपरेटिव की सभी 40 बैंक शाखाएं
राठौर ने कहा कि यूपी कोऑपरेटिव बैंक का बहुत अच्छा इतिहास है। 1944 से यह बैंक सेवा दे रही है। मौजूदा समय में प्रदेश के 23 जिलों में उप्र कोआपरेटिव बैंक का काम है। इन जिलों में 40 शाखाएं संचालित हैं। पहले 27 शाखाएं थीं। उनमें से सात शाखाएं घाटे में थीं। शाखाओं को बढ़ाकर 40 किया गया है। इस बार सभी 40 शाखाएं लाभ में हैं। हम 243 शाखाएं स्थापित करने की तैयारी में हैं। भविष्य में सभी जिलों में कोऑपरेटिव बैंक की शाखाएं होंगी।
एक अक्टूबर 2022 से व्याज सहित वापस दिया जा रहा पैसा
उन्होंने कहा कि जो कोऑपरेटिव बैंक 15-20 सालों से घाटे में चली आ रही थी। आज 98 करोड़ के लाभ में है। पहले सभी कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे थे। आज सबको वेतन दिया जा रहा है। एक अक्टूबर 2022 से ग्राहकों की मांग पर सभी बैंकों से ब्याज सहित पैसा वापस दिया जा रहा है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि ऐसी 800 न्याय पंचायतें हैं जहां पर सहकारी समितियां नहीं हैं या फिर शिथिल पड़ी हैं। कोशिश है कि हर ग्राम पंचायत में एक न एक सहकारी समिति गठित हो। इसके लिए मुख्यालय पर डेटा तैयार किया गया है।
कार्रवाई करके दिया गया संदेश
मंत्री जेपीएस राठौर ने बताया कि अब पहले जैसी व्यवस्था नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा रही है। मुजफ्फरनगर से सूचना मिली थी कि एक साथ 78 लोगों का स्थानांतरण किया गया। 10 का स्थगित किया गया। इसे संज्ञान में लेकर जिम्मेदार को निलंबित किया गया। जिलों में कुछ भी हो जाता है और यूपी कोऑपरेटिव बैंक मुख्यालय को को पता ही नहीं चलता था। अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय व्यवस्था में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सख्त कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार का इलाज ऑनलाइन है।
आज कोऑपरेटिव बैंक की चर्चा होती है। स्विस बैंक की चर्चा पिछले कुछ साल से नहीं हो रही है। वह इसलिए क्योंकि केंद्र की मोदी और राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। बैंकिंग सुविधाओं को बेहतर किया है। ऑनलाइन माध्यम से 25 लाख करोड़ भेजा गया है। अगर ऑनलाइन के बजाय अन्य माध्यमों से यह रकम भेजी गई होती तो कितना बड़ा भ्रष्टाचार हुआ होता।
इस अवसर पर बैंक के सभापति तेजवीर सिंह, उपसभापति जितेंद्र बहादुर सिंह, प्रमुख सचिव सहकारिता बी एल मीणा, अपर आयुक्त व निबंधक ( बैंकिंग) बी चंद्रकला, बैंक के प्रबंध निदेशक वी के मिश्र एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
दिलीप शुक्ल/मोहित
