प्रधानमंत्री ने काशी की महिमा का बखानकर काशीवासियों का जीता दिल
काशी में एक ही सरकार, जिनके हाथों में डमरू है
वाराणसी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद काशी और बाबा विश्वनाथ की महिमा का बखान भोजपुरी में कर वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल का दिल जीत लिया। गदगद नागरिक सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री की जमकर सराहना करते दिखे।
काशी तो अविनाशी है
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी तो काशी है, काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है। जब भी काशी ने करवल ली है देश का भाग्य बदला है। बनारस वो नगर है जहां से जगद्गुरू शंकराचार्य को डोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। काशी वो जगह है जहां भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की। छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहां पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। काशी अनंत है। काशी का योगदान अनंत है। यह अनंत परम्पराओं की विरासत है।
भोजपुरी में उन्होंने कहाकि ‘इ विश्वनाथ धाम बाबा आपन इच्छा से बनइले हउवन, उनके इच्छा के बिना पत्ता भी नाही हिल सकेला, कोई केतना बड़ा होई तो अपने घरे के होई। प्रधानमंत्री ने धाम से विरोधी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जब मैं बनारस आया तो एक विश्वास लेकर आया था। विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों का था। तब कुछ लोग जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे। वह लोग कहते थे कि कैसे होगा? होगा ही नहीं। कहते थे कि यहां तो ऐसा ही चलता है। मोदी जैसे बहुत आकर चले गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे पता था कि ये जड़ता बनारस की नहीं थी। हो भी नहीं सकती थी। इसमें थोड़ा बहुत राजनीति और थोड़ा निजी स्वार्थ था। कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहां आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है।
श्रीधर
