कुशीनगर (हि. स.)। 2023-24 के केंद्रीय बजट से प्रस्तावित कुशीनगर-गोरखपुर रेल पथ परियोजना को पुनः निराशा मिली है। परियोजना को बजट न मिलने से पर्यटन कारोबारियों व बौद्ध भिक्षुओं में मायूसी है। पर्यटन कारोबारी मोदी सरकार के अंतिम बजट से काफी उम्मीद पाले हुए थे। हालांकि मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल के सत्र 2017-18 में इस परियोजना को तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय महत्व प्राप्त गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थल कुशीनगर को भारत सरकार ने साल 2017-18 में रेलवे से जोड़ने के लिए 1476 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था।
इसके तहत सरदारनगर-कुशीनगर-पड़रौना 65 किमी लंबी रेल लाइन का निर्माण किया जाना था। भूमि अधिग्रहण को सर्वे किए जाने के लिए मंत्रालय ने एक करोड़ का बजट भी जारी किया था। सर्वे के तहत सरदारनगर से हेतिमपुर तक बिछी सरदारनगर चीनी मिल की नैरोगेज रेल लाइन को भी परियोजना में शामिल किया गया। सर्वेक्षण कार्य पूरा होकर मंत्रालय में रिपोर्ट भेज दी गई। किंतु कार्य आगे नही बढ़ पाया। बुधवार को पेश बजट में परियोजना को स्थान नही मिलने से पर्यटन उद्यमियों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है।
युवा बौद्ध भिक्षु भंते अशोक का कहना है कि रेल के नाम पर कुशीनगर को छला जा रहा है। केवल घोषणाओं से पर्यटन विकास नही होने वाला। सरकार को बजट में कुशीनगर रेल सेवा के लिए प्राविधान करना चाहिए था।
इंडो-थाई पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटे थाई वाट के पीआरओ अम्बिकेश त्रिपाठी का कहना है कि परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का न होना कुशीनगर के पर्यटन विकास में बड़ी बाधा है। एयरपोर्ट बना तो उड़ान नहीं, रेल की स्वीकृति मिली तो बजट नहीं। सरकार को इस विसंगति को दूर करना होगा।
गोपाल
