मेरठ (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान ने पश्चिम उप्र में किसान राजनीति को फिर से गर्मा दिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों अपने-अपने ढंग से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इसे प्रधानमंत्री की अच्छी सोच करार दिया है। जबकि उनके भाई राकेश टिकैत ने संसद द्वारा रद्द करने पर ही आंदोलन वापस लेने की बात कही है।
मुजफ्फरनगर में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने शुक्रवार को कहा कि कृषि कानूनों को वापस लेने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐलान सराहनीय है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि किसान बारूद के ढेर पर बैठे है। आंदोलन से ही जिंदा रहेंगे। यह जिम्मेदारी सबको निभानी होगी। जमीन से मोहभंग करना सरकार की साजिश है। जमीन कम हो रही है। किसान से जमीन बेचने और खरीदने का अधिकार भी यह लोग छीन लेंगे। जाति और मजहब भूलकर किसानों को एक होना होगा। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून वापस लेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अच्छी सोच है। प्रधानमंत्री ने बढ़िया कार्य किया है। कुछ लोग प्रधानमंत्री तक गलत संदेश पहुंचा रहे थे, जिसके चलते किसानों को लंबा संघर्ष करना पड़ा। किसान एक साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। अब प्रधानमंत्री को सूझबूझ आई है।
जबकि नरेश टिकैत के छोटे भाई व भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत को प्रधानमंत्री के ऐलान पर अभी भी विश्वास नहीं है। राकेश ने संसद में कानूनों के रद्द होने तक आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। अभी एमएसपी पर स्थिति साफ नहीं की गई है।
यह किसान की जीत है : धरी जयंत
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट करके कहा कि यह किसान की जीत है, हम सबकी जीत है। देश की जीत है। कृषि कानूनों की वापसी अच्छी बात है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और उप्र किसान मजदूर मार्चा के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बड़ा दिल दिखाया है। ये तीन कृषि कानून गन्ने को प्रभावित नहीं करते हैं। इसलिए पश्चिम उप्र में इसका कोई असर नहीं है। चाहे जो खुशियां मना लो, लेकिन कृषि कानूनों की वापसी से पश्चिम उप्र के किसानों को कुछ हासिल होने वाला नहीं है। हमारी लड़ाई जहां से शुरू हुई थी, वापस वहीं पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम उप्र में गन्ना, धान, मक्का, बाजरा आदि की खेती अधिक होती है। जिस पर एमएसपी कानून बनाने की जरूरत है। पंजाब व हरियाणा में भी धान के किसानों के लिए एमएसपी कानून जरूरी है। उन्हें कृषि कानूनों की वापसी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी किसानों की जती है। यह सभी किसानों, संगठनों और जनमानस की जीत है। भाकियू तोमर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि यह किसान एकता की जीत और तानाशाही सरकार की हार है। संसद में भी सरकार कानूनों को रद्द किया जाए।
