Saturday, April 11, 2026
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कृषि कानूनों के वापसी की घोषणा से किसानों में खुशी की लहर

मऊ (हि. स) पिछले एक साल से कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को राहत देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को प्रकाश पर्व के अवसर पर कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा कर दी जिससे जिले के किसान बेहद खुश नजर आए तथा उन्होंने इसे अपने जीत बताते हुए एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई भी दी।

आने वाले साल 2022 में पंजाब और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने कोई भी कदम उठाने के लिए कमर कस ली है।विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और भाजपा नहीं चाहती कि विपक्ष उनके खिलाफ कोई मुद्दा खड़ा कर सके। गले की फांस बनते जा रहे कृषि कानूनों को आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को प्रकाश पर्व के अवसर पर वापस लेने की घोषणा कर ही दी तथा आंदोलन कर रहे किसानों से घर जाने की अपील भी की।

कृषि कानूनों के वापसी की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद जिले के किसान काफी खुश दिखे ।उन्होंने इसे अपनी जीत करार देते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया तथा एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां भी दी हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री से अपनी आय दोगुना करने के वादे को पूरा करने के लिए भी कहा।

राष्ट्रीय दल के उत्तर प्रदेश के महासचिव ने मीडिया से बात करते हुए मोदी की तुलना तुगलक से कर डाली ।उन्होंने कहा कि जैसे तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद और फिर दौलताबाद से दिल्ली किया, जिसमें उसकी आधी सेना मर गई। उसी प्रकार हजारों किसान इस आंदोलन में मर गए ।भारी बारिश, कड़ाके की ठंड के बावजूद आंदोलनकारियों को खालिस्तानी, पाकिस्तानी और आतंकवादी कहा गया ।किसान सोना चांदी नहीं बल्कि पसीने की कीमत मांग रहा है। भाजपा की सोच किसानों के प्रति ठीक नहीं है। पार्टी में किसानों के हितैषी नेताओं को दबाया जाता है। भाजपा पूंजीपतियों के पैसे पर पलने वाली पार्टी है ।यह कानून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं है । केवल 2 साल स्थगित है।हमारी मांग है कि मृत किसानों को एक करोड़ मुआवजा, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा उनके नाम पर दिल्ली में स्मारक बनाया जाए।

कुल मिलाकर के जिले के किसान काफी खुश नजर आए। हालांकि कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा 2022 विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री के कृषि कानूनों के वापसी की घोषणा के बाद विपक्षी पार्टियां कौन सा दांव चलती हैं।

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