-म्यांमार के 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर हुई घोषणा
कुशीनगर (हि. स.)। म्यांमार के 73वें स्वाधीनता दिवस पर वहां की सरकार ने कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर को सर्वोच्च धार्मिक सम्मान ‘अभिध्वजा महारथागुरु’ से सम्मानित करने की घोषणा की है। म्यांमार की राजधानी यंगून में मार्च माह में होने वाले विशेष समारोह में भिक्षु यह सम्मान प्राप्त करेंगे। मूल रूप से म्यांमार के नागरिक और अब भारतीय नागरिकता प्राप्त भिक्षु को सम्मान के लिए चयन की जानकारी मिलते ही देश भर के बौद्ध भिक्षु खुश है।
म्यांमार में बर्ष 1936 में जन्मे ज्ञानेश्वर वर्ष 1963 में कुशीनगर आए थे। तबसे यहीं के होकर रह गए। वर्ष 1977 में सरकार ने भारतीय नागरिकता प्रदान की। भिक्षु को भारत में म्यांमार का सांस्कृतिक राजदूत माना जाता है। म्यांमार सरकार ने 1997 में ‘अग्गमहापण्डित’ , 2005 में ‘अग्गमहा सधम्मजोतिकाध्वज’ व 2016 में ‘अभिधज्जा अग्गमहासधम्मजोतिका’ नामक उपाधि से सम्मानित कर चुकी है। बुधवार को कुशीनगर के विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा, अधिशासी अधिकारी प्रेम शंकर गुप्त, भिक्षु शीलप्रकाश, भिक्षु नन्दिका, भंते महेंद्र , भंते अशोक, फ्रामहा फैतून , फ्रा जित्तीपन, भिक्षुणी धम्मनैना, दिव्येन्दु मणि त्रिपाठी आदि ने जानकारी मिलते ही भिक्षु को बुके, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया, भिक्षु के दीर्घायु की कामना की।
बौद्ध धर्म के प्रसार के साथ विकास में भी योगदान अनुकरणीय
विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि बौद्ध धर्म के करुणा, दया, मानवता, अहिंसा के सन्देश के प्रसार के साथ साथ कुशीनगर के विकास में भिक्षु का योगदान अनुकरणीय है। इन्होंने सतत विकास की चिंता की। विश्व पर्यटन के अनुरूप कार्य कराए। जिससे बौद्ध स्थली का मान बढ़ा। नई पहचान मिली। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैसे तो म्यांमार-भारत के मध्य मध्य प्राचीन काल से प्रगाढ़ सम्बन्ध है। इस सम्मान से सम्बन्धों में और नवीनता आयेगी।
कुशीनगर के भिक्षु ज्ञानेश्वर को मिलेगा म्यांमार का सर्वोच्च धार्मिक सम्मान ‘अभिध्वजा महारथागुरु’
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