-बुद्धनगरी के बाद होगा दूसरा प्रमुख पर्यटन केंद्र
कुशीनगर (हि. स.)। जैन धर्म के 24वें व तीर्थंकर महावीर स्वामी की निर्वाण स्थली पावापूरी (फाजिलनगर) को पर्यटन के अनुरूप विकसित किये जाने की कवायद शुरू हो गई है। योजना पावापुरी को बुद्धस्थली के बाद पर्यटन का दूसरा प्रमुख केंद्र बनाने की है। पर्यटन के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने के लिए फाजिलनगर को कुछ माह पूर्व सरकार ने नगर पंचायत घोषित किया है।
अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से उड़ान के बाद पर्यटकों की संभावित वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने अब यहां के ऐतिहासिक महत्व के स्थलों व पुरावशेषों के संरक्षण और सुंदरीकरण की दिशा में जुट गया है। जैन मंदिर के रंग रोगन, प्रसाधन, पेयजल, कलात्मक पेंटिंग, बैठने की व्यवस्था, सुंदरीकरण, लाइटिंग आदि की जा रही है। नगर के प्रमुख मार्ग कॉलेज रोड का चौड़ीकरण व उच्चीकरण का व स्ट्रीट लाइट लगाने कार्य किया जा रहा है। बुद्धकालीन अवशेष समेटे छठियांव में अतिक्रमण हटाकर चारदीवारी का निर्माण व हाइवे से छठियांव तक सड़क चौड़ी की जा रही है। छठियांव गेट के नवीनीकरण व सुंदरीकरण करने के साथ मार्ग के दोनों ओर शोभाकार पौधे लगाए जा रहे हैं।
पावापुरी के रूप में पूज्यनीय जैन धर्मावलंबियों में फाजिलनगर ‘पावापुरी’ के नाम से पूज्यनीय है। यहां महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।जैन श्रद्धालुओं ने यहाँ पर एक जैन मन्दिर का निर्माण कराया है। मन्दिर में ‘मनस्तम्भ’ और चार सुन्दर मूर्तियाँ हैं। यहां कार्तिक पूर्णिमा को ‘निर्वाण महोत्सव’ का आयोजन होता है।
यहां भी मिले बुद्धकालीन अवशेषज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा के अनुसार यहां पुरातत्व विभाग द्वारा मिट्टी के टीला के उत्खनन से अनेक पुरावशेष प्राप्त हुए है। यहां के विस्तृत परिसर में बौद्ध विहार के अवशेष मिले हैं। माना जाता है कि वैशाली से कुशीनगर जाते समय महात्मा बुद्ध यहाँ रुके थे और अपने एक शिष्य के घर भोजन किया था। जिसके बाद उनकी तबियत खराब हुई और कुशीनगर पहुंच वो निर्वाण को प्राप्त हो गए। “फाजिलनगर जैन व बौद्ध दोनों ही अनुयाइयों के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यटन के दृष्टि से इसका विकास समय की मांग है। अनुयाइयों को बेहतर सुविधा मिले इस दिशा में प्रशासन कार्य कर रहा है।
कुशीनगर की पावापुरी के सुंदरीकरण में जुटा प्रशासन
RELATED ARTICLES
