कुशीनगर (हि.स.)। बाढ़ ने पूर्वांचल में तबाही मचानी शुरू कर दी है। तकरीबन गोरखपुर-बस्ती मंडलों के सभी जिलों में नदी क्षेत्र की स्थिति काफी नाजुक है। यही हाल कुशीनगर में भी बन रहा है। यहां से गुजरने वाली नारायणी नदी का जलस्तर नीचे उतर रहा है, फिर भी दुश्वारियां बढ़ने वाली दिख रहीं हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कीचड़ से सने घर में लोगों के लौटने की जहां विवशता है, वहीं ठोकरों से तेज हो रही कटान एक बार फिर उन्हें डरा रही है। अगर ठोकर पर कटान हो गयी तो मुख्य बंधे पर दबाव बढ़ना तय है। यह लोगों के लिए खतरे की घंटी है।
किमी आठ लक्ष्मीपुर के पास बने ठोकर का मुख्य हिस्सा नदी में धंस गया है। अब नारायणी नदी ने ठोकर के बीच वाले हिस्से को निशाना बना लिया है। आशंका जताई जा रही है कि यदि ठोकर कटा तो नदी का दबाव मुख्य बंधे पर होगा। इससे स्थिति एक बार फिर नाजुक हो सकती है। इससे ग्रामीणों की बेचैनी भी बढ़ गई है। हालांकि, विभाग ने काम में तेजी लाई है। युद्ध स्तर पर कार्य हो रहा है। बावजूद इसके आशा अनुरूप अभी सफलता मिलती नहीं दिख रही।
15 दिनों से सहमे हैं ग्रामीण
पंद्रह दिनों पूर्व धंसे ठोकर के मुख्य हिस्से को देखकर ग्रामीण काफी डरे हैं। बंधे के निकट रहने वाले ग्रामीणों का डर दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग हर रोज आश्वासन दे रहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। कटान को रोक लिया जायेगा। जबकि नदी का रुख ठीक इसके विपरीत है। कटान में लगातार तेजी आ रही है।
इस सम्बंध में बाढ़ विभाग के एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि नदी में तेज बहाव (करेंट) होने से थोड़ा दबाव है। किंतु मुख्य बंधे को कोई खतरा नहीं है। हर संवेदनशील प्वाइंट पर विभाग की नजर है। संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
