नई दिल्ली (हि.स.)। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की घोषणा का स्वागत करते हुए इसे किसान-खेत मजदूरों की जीत बताया है। उन्होंने सरकार को परामर्श दिया है कि वह राजहठ और अहंकार छोड़ विपक्ष और जनता की परामर्श लेकर फैसले ले।
कांग्रेस की ओर से जारी अधिकारिक वक्तव्य में सोनिया ने कहा कि लगभग 12 महीने के गांधीवादी आंदोलन के बाद आज देश के 62 करोड़ अन्नदाताओं-किसानों-खेत मजदूरों के संघर्ष व इच्छाशक्ति की जीत हुई। आज उन 700 से अधिक किसान परिवारों की कुर्बानी रंग लाई, जिनके परिवारजनों ने न्याय के इस संघर्ष में अपनी जान न्योछावर की। आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई।
कहा, “मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री व भाजपा सरकार अपना राजहठ व अहंकार छोड़कर किसान कल्याण की नीतियों को लागू करने की ओर ध्यान देंगे। एमएसपी सुनिश्चित करेंगे व भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाने से पहले राज्य सरकारों, किसान संगठनों और विपक्षी दलों की सहमति बनाई जाएगी।”
सोनिया ने कहा कि प्रजातंत्र में कोई भी निर्णय सबसे चर्चा कर, सभी प्रभावित लोगों की सहमति और विपक्ष के साथ राय मशवरे के बाद ही लिया जाना चाहिए। उम्मीद है कि मोदी सरकार ने कम से कम भविष्य के लिए कुछ सीख ली होगी।
कहा कि पिछले सात सालों से भाजपा सरकार ने लगातार खेती पर अलग-अलग तरीके से हमला बोला है। चाहे भाजपा सरकार बनते ही किसान को दिए जाने वाले बोनस को बंद करने की बात हो, या फिर किसान की जमीन के उचित मुआवज़ा कानून को अध्यादेश लाकर समाप्त करना हो। चाहे प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक किसान को लागत से 50 प्रतिशत अधिक मुनाफा देने से इनकार कर देना हो, या फिर डीज़ल व कृषि उत्पाद की लागतों में भारी भरकम वृद्धि हो, या फिर तीन खेती विरोधी काले कानूनों का हमला हो।
सोनिया ने कहा कि आज जब भारत सरकार के एनएसओ के मुताबिक किसान की औसत आय 27 रुपये प्रतिदिन रह गई हो, और देश के किसान पर औसत कर्ज 74,000 रुपये हो, तो सरकार व हर व्यक्ति को दोबारा सोचने की जरूरत है कि खेती किस प्रकार से सही मायनों में मुनाफे का सौदा बने। किसान को उसकी फसल की सही कीमत यानि एमएसपी कैसे मिले।
