– दक्षिण भारत के महान संगीतज्ञ मुथुस्वामी दीक्षित को समर्पित संगीत सभा
वाराणसी (हि.स.)। कांची कामकोटी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य शंकर विजेंद्र सरस्वती महाराज के चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत शिवाला स्थित चेत सिंह किला परिसर में दक्षिण भारत के महान संगीतज्ञ मुथु स्वामी दीक्षित को समर्पित संगीत सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि मुथुस्वामी दीक्षित तमिलनाडु के महान कवि, संगीतज्ञ, और साहित्यकार थे।
उन्होंने अपने बाल्यावस्था में काशी को अपना कर्म क्षेत्र बनाया। यहीं पर भगवती गंगा की कृपा से उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई। जैसा कि बताया जाता है उनको साक्षात गंगा से वीणा की प्राप्ति हुई। उन्होंने काशी में रहकर कर्नाटक संगीत में साधना के साथ अनेक रचनाएं की। जिसमें काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, विशालाक्षी, काल भैरव आदि प्रमुख देवताओं पर आधारित रचनाएं भी रही।
सभा में कांची कामकोटि पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य शंकर विजेंद्र सरस्वती महाराज ने अपने आर्शिवचन में कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ सभी को अपने अनुग्रह से अभिसिंचित करते हैं। काशी से किया हुआ कार्य विश्व को संदेश देता है। दीक्षित जैसे महान कवि की कृति आज भी कर्नाटक संगीत के लिए प्रासंगिक है। आज भी इन कृतियों को गाकर संगीत के विद्वान अपने को धन्य समझते है। ऐसे महान कवि के लिए प्रति वर्ष काशी में इस तरह का आयोजन होना चाहिए। जिससे उत्तर और दक्षिण दोनों का समागम हो सके।
इससे पूर्व यज्ञ अनुष्ठान के कार्यक्रम में 16000 मोदकों के साथ आहुति दी गई। श्रीरूद्र के आचार्य सुब्रमण्यम घनपाठी के आचार्यत्व में यज्ञ किया गया। दिनकर शास्त्री के आचार्यत्व में चंडी पाठ एवं हवन हुआ। कार्यक्रम में कांची मठ के प्रबंधक वीएस सुब्रमण्यम मणि, चक्रवर्ती विजय नावड़ आदि की भी मौजूदगी रही।
श्रीधर/मोहित
