Wednesday, March 25, 2026
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 काशी में गंगा सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, गंगा का किया दुग्धाभिषेक

वाराणसी (हि.स.)। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (गंगा सप्तमी) पर गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना की।

मां गंगा के अवतरण दिवस पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से घाटों पर उमड़ने लगी थी। दिन चढ़ने तक प्राचीन दशाश्वमेधघाट, शीतला घाट, पंचगंगा घाट, अहिल्याबाई घाट, मानसरोवर घाट, अस्सी घाट पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही। लोगों ने गंगा स्नान के बाद मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना, दान पुण्य करने के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। बाबा के दरबार में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत भूमि को स्वर्ग बनाती और यहां की सभ्यता और संस्कृति का पोषण करती गंगा नदी इस धरती की अलौकिक शोभा है। गंगा का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40 फीसदी आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। मां गंगा के बिना भारतीय सभ्यता अधूरी है। हमें मिलकर गंगा का संरक्षण करना होगा।

आज ही के दिन भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं गंगा

वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं। इसलिए इस दिन मां गंगा का अवतरण दिवस मनाया जाता है। कहा जाता है कि मां गंगा का प्रवाह इतना तीव्र एवं शक्तिशाली था कि उसके कारण समूची पृथ्वी का संतुलन बिगड़ सकता था। ऐसे में गंगा के वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर लिया। कुछ समय बाद भगवान शिव ने देवी गंगा को जटाओं से मुक्त किया ताकि वह भागीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने का अपना उद्देश्य पूरा कर सकें।

श्रीधर/पवन/बृजनंदन

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