Tuesday, March 31, 2026
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काशी धर्म परिषद से जुड़े संत अपर पुलिस आयुक्त से मिले

-जुमे की नमाज के बाद अशांति की आशंका जताई

-बाहर से आये जमातियों की सूची बनाने की मांग

वाराणसी(हि.स.)। काशी धर्म परिषद से जुड़े संतों के प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को अपर पुलिस आयुक्त से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान संतों ने शुक्रवार को जुमे के नमाज के बाद अशांति की आशंका जताई। सन्तों ने शहर में आये जमातियों की सूची बनाने की मांग की। संतों ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से भी मस्जिद में नमाजियों की सूची बनाने और परिचय पत्र जारी करने करने का सुझाव दिया। महंत बालक दास ने कहा कि हम शुक्रवार को लेकर आशंकित हैं, इसलिए हमने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की है कि मुस्लिम समाज को शांति, सद्भावना और कानून के रास्ते पर ले जायें। नमाजियों द्वारा पथराव मुस्लिम धर्मगुरुओं की विफलता मानी जाएगी। जो आपकी बात नहीं मानते, उनको नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में क्यों आने देते हैं। मुस्लिम धर्मगुरु शांति व्यवस्था की बहाली के लिए प्रशासन का सहयोग करें। हमारी कड़ी निगाह शुक्रवार पर है, उसके बाद हम कोई फैसला करेंगे।

इसके पहले काशी धर्म परिषद की बैठक सुभाष भवन, लमही में बुलायी गई । मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी की पहल पर बुलाई गई बैठक में धर्म परिषद के अध्यक्ष एवं पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालक दास भी शामिल हुए। बैठक में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक अफसर बाबा ने अपने ऊपर हुए हमले को लेकर पूरी घटना सुनाई।

बैठक में केन्द्रीय धर्माधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रस्ताव पारित किया कि मुस्लिम धर्मगुरु मुस्लिम समाज को हिंसा करने से रोकें। नमाज के बाद हाथों में पत्थर लेकर निर्दोष लोगों को मारना कहां का धर्म है। जुमे के दिन जो भी तकरीर हो, उसे रिकॉर्ड किया जाए। देवबंदी मस्जिदों और मरकजों में जो जमाती बाहर से आये हैं, उनकी पहचान की जाए। बैठक में विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दू धर्माचार्यों की अपील पर मुस्लिम धर्मगुरु जरूर विचार करें।

-काशी धर्म परिषद की अपील

मुस्लिम धर्मगुरू ध्यान दें ‘जुमे के नमाज के दिन मुस्लिम समाज के नमाजियों को किसी तरह कोई भड़काऊ तकरीर न दें’। दुकानों पर तोड़–फोड़ करने, पत्थर चलाने और हिंसक होने से इस्लाम बदनाम होगा। ऐसा काम न करें, जिससे मुसलमानों के नमाज पर प्रश्न चिह्न खड़ा हो जाए। जिस मस्जिद से नमाजी निकलकर पत्थरबाजी करते हों, उस मस्जिद के मौलाना और मुतवल्ली पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। शांति के लिए जरूरी है सभी लोग सभी धर्मों का सम्मान करें। मुस्लिम समुदाय के लोग नफरत फैलाने वाले, हिंसा फैलाने वालों का साथ न दें और न ही हिंसा करने वाले व्यक्तियों का समर्थन करें।प्रशासन से अपील है कि बाहर से आए हुए मौलानाओं पर नजर रखें और हर कीमत पर बनारस में शांति व्यवस्था बहाल करें। पीएफआई व अन्य हिंसक संगठन जो धर्म के नाम पर हिंसा फैलाते हैं, मुस्लिम धर्मगुरू उस पर भी पैनी नजर रखें और मुस्लिम नौजवानों को उनसे जुड़ने से रोकें। शुक्रवार को जुमे की नमाज के समय भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी मुस्लिम समाज के धर्मगुरू एवं मस्जिदों के कार्यकर्ता स्वयं लें। काशी से सभी धर्मों के लोग मिलकर शांति और एकता का संदेश पूरी दुनिया को भेजें। मस्जिदों से ऐसी तकरीर न करें जिससे दूसरे धर्म की भावनाएं भड़के और नमाजी कानून को अपने हाथ में लें।

श्रीधर

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