Monday, April 13, 2026
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काशी की सांस्कृतिक बहुलता और उसकी प्राचीनता के प्रमाण गंगा घाट : प्रो. विजय नाथ

-अमृत महोत्सव में बीएचयू छात्रों ने गंगाघाटों की संस्कृति, कला जानी, बनाई रंगोली

वाराणसी (हि.स.)। आजादी के अमृत महोत्सव में बीएचयू राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में रविवार को 50 स्वयंसेवक छात्रों को हेरिटेज घाट वाक में रीवा घाट से राजघाट का भ्रमण करवाया गया। भ्रमण में शामिल उत्साही छात्रों को काशी के घाटों से जुड़ी संस्कृति, कला व साहित्य से परिचित करवाया गया।

इस दौरान सामाजिक संस्था अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवाक विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं न्यूरो चिकित्सक प्रो. विजय नाथ मिश्र ने कहा कि काशी की सांस्कृतिक बहुलता और उसकी प्राचीनता के प्रमाण घाट ही हैं। इन घाटों पर जो उत्सव होते हैं, वे भी हमारी काशी को वैश्विक पहचान देते हैं। प्रो. मिश्र ने छात्रों को चेत सिंह घाट, तुलसी घाट के साथ पंचगंगा महातीर्थ और हनुमान घाट के बारे में भी जानकारी दी।

अध्यक्षता करते हुए भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि काशी में गंगाघाट व शिव का बहुत महत्व रहा है। यहां के घाटों पर ज्ञान प्रवाहित होता है क्योंकि गंगा खुद ही ब्रह्म द्रवी नदी मानी गई है। उन्होंने कहा कि इस उत्तर- सत्य समय में यहां के घाट उत्तम-सत्य के माध्यम हैं, जिनसे जीवन-सत्य मिलता है। यहां के घाट खुद में गति के प्रमाण हैं और इन्हीं घाटों पर भ्रमण करते हुए शंकराचार्य, रामानंद,बल्लभाचार्य,तुलसी,पंडितराज जगन्नाथ,सुब्रह्मण्यम स्वामी,प्रसाद जैसे महान चिंतकों को ज्ञान मिला।

इस अवसर पर डॉ अष्टभुजा मिश्र, डॉ विंध्याचल यादव, डॉ प्रभात मिश्र, डॉ विवेक सिंह, डॉ रवि सोनकर, डॉ अमरजीत राम ने भी काशी के घाटों के सांस्कृतिक महत्व को बताया। पूरा आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत सम्पन्न हुआ। जिसका संयोजन एनएसएस बीएचयू इकाई-एफ के डॉ महेंद्र प्रसाद कुशवाहा और धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक प्रो. बाला लखेन्द्र ने किया। घाटवाक में छात्रों ने रंगोली, कविता पोस्टर व श्रम दान के माध्यम से जन जागरुकता अभियान चलाया। घाट वाक में सुनीता शुक्ल, शिव विश्वकर्मा, वाचस्पति उपाध्याय, शैलेश तिवारी सहित कई छात्र शामिल रहे।

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