Wednesday, March 4, 2026
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”काला-नमक” चावल को ”गिफ्ट हैम्पर” से वैश्विक पहचान दिलवाने की कवायद

– बौद्ध अतिथियों को दिया जाएगा सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल का गिफ्ट हैम्पर

– भगवान बुद्ध का महाप्रसाद है कालानमक चावल

गोरखपुर (हि.स.)। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में 20 अक्टूबर को बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर अनेक बौद्ध अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इन्हें ”बुद्ध का महाप्रसाद”, कालानमक चावल उपहार के रुप में दिया जाएगा। यूपी सरकार इस ”गिफ्ट हैम्पर” के बहाने कालानमक चावल की सुगंध को विश्वफलक पर बिखेर कर इसे वैश्विक पहचान दिलवाएगी।

भगवान बुद्ध के जन्मस्थल क्षेत्र से जुड़े सिद्धार्थनगर के विशिष्ट उत्पाद में कालानमक चावल शुमार है। यह अपने स्वाद, सुगंध और पोषण के मामले में भी बेजोड़ है। शायद यही वजह है कि भगवान बुद्ध ने न सिर्फ खुद ही कालानमक चावल को ग्रहण किया बल्कि इसे प्रसाद रूप में अपने शिष्यों को भी तृप्त कराया था।

विलुप्त से हो रहे कालानमक प्रजाति के धान के संरक्षण और संवर्धन से ही इस महाप्रसाद की ग्राह्यता बनी रह सकती है। इसके लिए योगी सरकार ने ”एक जिला एक उत्पाद” (ओडीओपी) योजना में शामिल किया और अब इसकी वैश्विक पहचान बनाने का प्रयास कर रही है।

यही वजह है कि कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के उद्घाटन समारोह में देश-विदेश से 20 अक्टूबर को आ रहे प्रमुख बौद्ध अनुयायियों और अन्य मेहमानों को कालानमक चावल का गिफ्ट हैम्पर देने की तैयारी है। यह उपहार देने के पीछे इसकी ग्लोबल ब्रांडिंग को और मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है।

20 अक्टूबर ही क्यों है खास

20 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है। सनातन और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए ”पूर्णिमा” का विशेष धार्मिक-आध्यात्मिक” महत्व है। बौद्ध अनुयायी इस दिन विशेष पूजन में लीन रहते हैं तो सनातनी धर्मावलंबियों के मुताबिक शरद पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणें ”अमृत वर्षा” करतीं हैं। दोनों ही दृष्टि से यह सकारात्मक तिथियां हैं। माना जा रहा है कि इस वजह से ही आश्विन पूर्णिमा की इस तिथि यानी 20 अक्टूबर को कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने आ रहे हैं।

हैम्पर पर अंकित है भगवान बुद्ध की उक्ति

अतिथियों को भेंट करने के लिए जिस गिफ्ट हैम्पर को तैयार किया गया है, उस पर भगवान महात्मा बुद्ध की उक्ति को अंकित किया गया है। ‘बुद्धा राइस’ के नाम तैयार पैकिंग पर महात्मा बुद्ध की कह हुई बात ‘इस चावल की विशिष्ट महक हमेशा लोगों को मेरी (महात्मा बुद्ध की) याद दिलाएगी’ अंकित है।

कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

कालानमक चावल के संवर्धन को लेकर सक्रिय संस्था पीआरडीएफ के वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी कहते हैं कि इससे केवल सिद्धार्थनगर ही नहीं, बल्कि कालानमक धान के लिए भौगौलिक सम्पदा (जीआई) घोषित समान जलवायु वाले जिलों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती की खेती करने वाले किसानों को भी बड़ा बाजार उपलब्ध होगी। यह मंच कालानमक की खेती को पंख लगाएगा।

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