Friday, March 27, 2026
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कालाजार के खात्मे के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध

लखनऊ(हि.स.)। कालाजार एक गंभीर वेक्टर जनित रोग है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस रोग के उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार कालाजार प्रभावित जनपदों के वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी देती रहती है।

उत्तर प्रदेश के निदेशक संचारी रोग डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि प्रदेश को कालाजार उन्मूलन की दिशा में अभूतपूर्व सफलता मिली है। वर्ष 2015 में कालाजार के 131 केस थे जो वर्ष 2022 में घटकर केवल 15 रह गए हैं। कालाजार के जो केसेस आ भी रहें हैं वह बिहार और नेपाल सीमाओं से सटे गांवों से हैं। हम सभी को यह प्रयास करने होंगे कि कहीं भी अगर कालाजार का एक भी केस मिलता है तो उसके आस-पास के क्षेत्रों में एक्टिव केस डिटेक्शन अभियान शुरू किया जाए ताकि कालाजार का और प्रसार न हो सके।

डा. ए.के सिंह ने बताया कि प्रदेश में कालाजार छह जनपदों के मात्र 46 ब्लाक तक ही सीमित रह गया है। वर्ष 2019 से उत्तर प्रदेश कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को बनाये रखा है, यानि प्रति 10 हजार की आबादी पर एक से कम केस हैं और हम अथक प्रयास कर रहे हैं कि प्रति 10 हजार की आबादी पर 0.5 से कम केस का लक्ष्य प्राप्त हो सके। यह चुनौतीपूर्ण तो है मगर हम सब एक साथ समन्वय और अन्तर्विभागीय सहयोग से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

बालू मक्खी से फैलता है कालाजार रोग

अपर निदेशक मलेरिया और वेक्टर बार्न डिजीज के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. वी. पी. सिंह ने बताया कि कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है जो कि बालू मक्खी से फैलता है। बालू मक्खी कालाजार रोग के परजीवी लीशमेनिया डोनोवानी को एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलाती है। बालू मक्खी कम रोशनी वाली और नम जगहों जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों, जानवर बांधने के स्थान तथा नम मिट्टी में रहती है। कालाजार एंडेमिक जनपदों में यदि किसी को दो सप्ताह से ज्यादा से बुखार हो और वह मलेरिया या अन्य उपचार से ठीक न हो तो उसे कालाजार हो सकता है।

उन्होंने बताया कि कालाजार की पुष्टि के लिए निःशुल्क जांच निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है एवं समुचित उपचार भी जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क उपलब्ध है। कालाजार उत्पन्न करने वाले परजीवी के संक्रमण से रोगों से लड़ने की क्षमता घट जाती है जिसके कारण उसे दूसरे रोगों से संक्रमित होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि कालाजार उन्मूलन की वर्तमान रणनीति के मुख्य रूप से दो स्तम्भ हैं, पहला रोगियों की पहचान, शीघ्र निदान व उपचार और दूसरा कीटनाशक दवा का छिड़काव यानि (आई.आर.एस)। आई.आर.एस. एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा घर के अन्दर की दीवारों और घर में जानवरों के लिए बनाए गए आश्रय स्थलों पर दवा का छिड़काव किया जाता है ताकि कालाजार बीमारी का कारण बनने वाली बालू मक्खी को समाप्त किया जा सके। कीटनाशक का छिड़काव यदि सभी हिस्सों में नहीं किया गया हो तो बालू मक्खी बिना छिड़काव वाले सतह पर रह जायेगी और कालाजार फैलाने में सहायक होगी।

प्रदेश सरकार द्वारा चलाये गए संचारी रोग नियंत्रण अभियान में फाइलेरिया और कालाजार जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश में इस बीमारी की रोकथाम व जागरूकता के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, पाथ और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज जैसी संस्था भी सहयोग कर रही है।

बृजनन्दन

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