प्रयागराज (हि.स.)। एशिया के सबसे बड़े ट्रस्ट कायस्थ पाठशाला की स्थापना शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने एवं समाज के गरीब, मजलूमों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए हुआ। लेकिन दुर्भाग्यवश ट्रस्ट के मौजूदा पदाधिकारी विस्तार देने के बजाय उसकी सम्पत्ति व जमीनों का दुरूपयोग कर रहे हैं, जिससे ट्रस्ट का नुकसान हो रहा है।
यह बातें प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए ट्रस्ट के पूर्व उपाध्यक्ष जीपी श्रीवास्तव एवं पूर्व कार्यकारिणी सदस्य डॉ सुशील सिन्हा ने संयुक्त रूप से कही। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के जरिये तमाम स्कूल, कॉलेज व डिग्री कॉलेज बनाये गये हैं। लेकिन ट्रस्ट की मौजूदा कार्यकारिणी इसके विपरीत कार्य कर रही है। अब ट्रस्ट की जमीन विजातीय बड़े बिल्डर को देने की तैयारी चल रही है, जो सीएमपी डिग्री कालेज के सामने लगभग पांच एकड़ जमीन, जिस पर मौजूदा समय इंडियन ह्यूम पाइप का वर्कशाप है। जिसके पट्टे का करार समय सीमा समाप्त हो चुका है। वर्कशाप को हटाने का मामला कोर्ट में लम्बित है। अब अरबों रूपये की उसी जमीन को बिल्डर को देकर शापिंग मॉल, होटल व दुकानें बनाने की तैयारी चल रही है। जो ट्रस्ट की नीतियों के विपरीत है।
डॉ सुशील सिन्हा ने कहा कि हर ट्रस्टी चाहता है कि खाली जमीन पर कोई विद्यालय या उत्कृष्ट सुविधायुक्त अस्पताल बनाया जाय, जिससे आम जनमानस को उसका लाभ मिले। अगर ट्रस्ट ने अपनी नीतियां न बदली तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कानूनी लड़ाई लड़ी जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट सदस्यता के नाम पर धांधली करती है। जो कायस्थ नहीं हैं, उन्हें भी सदस्य बनाकर चुनाव में वोट डलवाया जाता है। कहा कि आजकल हर चीज ऑनलाइन है, लेकिन कायस्थ पाठशाला के सदस्यों की सूची ऑनलाइन नहीं की गयी है। इस दौरान जी.पी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, डॉ सुशील सिन्हा, दिलीप कुमार श्रीवास्तव, प्रेम प्रकाश कुलश्रेष्ठ, अरूण कुमार श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, अखिलेश श्रीवास्तव, सिद्धार्थ सिन्हा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
