कानपुर (हि.स.)। मौनी अमावस्या का पर्व मंगलवार को मनाया गया और इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व है। इसी के तहत सुबह से प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला शुरू हो गया। बिठूर के ब्रह्मावर्त और शहर में सरसैया घाट समेत प्रमुख घाटों पर भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। गंगा घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद, तिल, अन्न व धन का दान किया और धार्मिक अनुष्ठान कराए एवं पुरोहितों एवं गरीबों को भोजन कराया। गलन भरी ठंड के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं रहा।
हिंदू धर्म में माघ मास की अमावस्या का खास महत्व है। विद्वानों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और पितरों के साथ-साथ श्रीविष्णु का पूजन किया जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि आज मौनी अमावस्या के दिन जो भी स्नान ध्यान करता है उसके कई जन्मों के पापों का नाश हो जाता है और साथ ही आज मंगलवार का दिन है। ऐसा दिन अमृत के समान है। सौ सालों में भी इस तरह का योग देखने को नहीं मिलता है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान करने से सुख समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मौनी का अर्थ मौन और मुनि से भी है, इसलिए मौन स्नान के बाद घरों में भी पूजन करने का सिलिसला जारी है।
सरसैया घाट पर स्नान को पहुंचे दिनेश बाजपेयी बताते हैं कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान और दान करने से अनजाने में हुए पाप मिटते हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पितृ दोष का भी निवारण होता है। आचार्य रामऔतार के मुताबिक, यदि किसी को पितृ दोष हो तो ऐसा करने से परिवार में सुख, शांति रहती है।
मौनी अमावस्या के दिन स्नान दान का बहुत महत्व बताया गया है। वहीं मौनी अमावस्या को लेकर प्रशासनिक व्यवस्थाएं दुरुस्त रही। गंगा घाटों पर पुलिस की मुस्तैदी देखी गई। गंगा घाटों पर साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। गलन भरी ठंड को देखते हुए सामाजिक संस्थाओं एवं प्रशासन ने जगह-जगह अलाव की व्यवस्था कराई। जो गंगा स्नानार्थियों एवं श्रद्धालुओं के लिए काफी राहत भरी रही।
अजय/मोहित
