कानपुर । कोरोना जैसी आपदा को कुछ निजी अस्पतालों ने कमाई का जरिया मान लिया है। रोगियों से अंधाधुंध वसूली की जा रही है। रोगियों को जो बिल थमाए जा रहे हैं, उसका प्रतिघंटे 10 हजार रुपये का औसत निकल रहा है। कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों के अलावा नॉन कोविड अस्पताल भी मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे। रोगियों का सैच्युरेशन ठीक है, फिर भी उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत बता दी जाती है। ऑक्सीजन की किल्लत शुरू होने के बाद अस्पतालों को इसके नाम पर कमाई का नया जरिया मिल गया है। अगर किसी रोगी का ऑक्सीजन लेवल 90 आता है, उसे डरा दिया जाता है। इसके बाद ऑक्सीजन लगा दी जाती है। ऑक्सीजन लगते ही बिल तेजी से बढऩे लगता है। ऐसे रोगी को आईसीयू की जरूरत बताई जाती है। यहां बिल और मोटा हो जाता है। कोरोना का नया स्ट्रेन आने के बाद स्थिति और बिगड़ी है। इससे संक्रमित बहुत से रोगियों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट आती है और फेफड़े खराब होते हैं। इस स्ट्रेन के नाम पर रोगी को डरा दिया जाता है। निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन के अलावा और भी मद प्रबंधन ने बना रखे हैं। इनमें पीपीई किट सरीखे कई खर्च बता दिए जाते हैं। इससे तीमारदारों की जान की आफत आ जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ओवर चार्जिंग के मामले में एक अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, फिर भी ऐसे मामले थम नहीं रहे। सीएमओ डॉ. अनिल मिश्रा ने इस संबंध में आदेश भी जारी किया है कि अस्पताल इस तरह की हरकतें न करें। कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में सहयोग करें।
कानपुर में सांसों की कीमत 10 हजार रुपए प्रतिघंटा
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