Friday, February 13, 2026
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कानपुर में आरटीई का हो रहा उल्लंघन, 38 फीसदी बच्चों को मिला प्रवेश

कानपुर (हि.स.)। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम इसलिए लाया गया था कि गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिल सके। लेकिन कानपुर में अधिकारियों के लचर रवैये से निजी विद्यालय आरटीई के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

जनपद में अब तक महज साढ़े 38 फीसदी बच्चों का आरटीई के तहत प्रवेश मिल सका है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो अच्छे विद्यालय हैं उनमें प्रवेश के लिए अभिभावकों को सबसे अधिक परेशान किया जा रहा है।

गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का मौका मिले, इसको लेकर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लाया गया जो एक अप्रैल 2010 से लागू हो गया। इसके बावजूद हर वर्ष निजी विद्यालय आरटीई के तहत गरीब बच्चों को नाममात्र ही प्रवेश देते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण कानपुर में भी देखा जा सकता है।

आरटीई की प्रक्रिया को कई महीनें हो गये और अभिभावक निजी विद्यालयों में प्रवेश को लेकर भटक रहे हैं, लेकिन विद्यालय प्रबंधन कोई न कोई बहाना करके अभिभावकों को टरका रहा है। इसी के चलते करीब तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद जनपद में महज साढ़े 38 फीसदी ही उन बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश मिल सका, जिनका नाम आरटीई में आ चुका है। बाकी बचे हुए बच्चे प्रक्रिया में नाम आने के बाद भी शिक्षा से वंचित चल रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि जनपद में निजी विद्यालय आरटीई के नियमों की किस प्रकार धज्जियां उड़ा रहे हैं। हालांकि इसमें कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी भी दोषी हैं। आखिरकार अधिकारी क्यों निजी विद्यालयों पर विधिक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

2700 बच्चों को मिल सका प्रवेश

जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि जनपद में आरटीई के तहत सात हजार बच्चों का चयन किया गया है। इसमें अभी तक सिर्फ 2700 बच्चों को ही निजी विद्यालयों में प्रवेश मिल सका है। एबीएसए (सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी) को निर्देशित किया गया है कि आरटीई के तहत लॉटरी प्रक्रिया में आये बच्चों का हर हाल में निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाये। इसके साथ ही सभी अपर नगर मजिस्ट्रेटों को भी निर्देशित किया गया है कि अगर एबीएसए के कहने पर विद्यालय बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये। इसके साथ ही एडीएम भू अध्याप्ति सतेन्द्र कुमार को मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरी तरह से प्रयास किया जाएगा कि इस माह सभी ऐसे बच्चों का प्रवेश दिलाया जा सके।

अजय

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