कानपुर (हि. स.)। कोरोना काल में जहां अनलॉक 5 में भक्तों के लिए धार्मिक स्थलों को खोल दिया गया है। वहींं शारदीय नवरात्र में मंदिर में आने वाले सभी भक्तों को कोविड 19 की जारी की गई गाइड लाइन का पालन कराते हुए मंदिर प्रांगण में प्रवेश दिया जा रहा है। इस बार कोरोना रूपी दानव का असर शारदीय नवरात्र में देखने को भी मिल रहा है। भक्तों में ईश्वर के प्रति आस्था बरकरार है। लेकिन मंदिर की सीढ़ियों तक कम ही श्रद्धालु पहुंच रहे है।
बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी माता के दरबार के सेवक नरेश पुजारी ने बताया कि हर वर्ष माता के नवरात्र में जिस तरह से मंदिरों में भक्तों तांता लगा रहा करता था। मंदिर प्रांगण में भक्तों की भीड़ को संभालना मुश्किल हो जाता था। इस बार शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन बहुत कम संख्या में भक्त दर्शन के लिए मंदिर आ रहे है। नवरात्र के पहले दिन तो मंदिर प्रांगण में भीड़ देखने को मिली थी। ये देखकर तो लग रहा था कि मंदिर में रौनक लौट आयी है। लेकिन आज बहुत कम संख्या में भीड़ नजर आ रही है।
मंदिर के पुजारी जी ने जानकारी देते हुए बताया कि माता तपेश्वरी जी का धाम ये सिद्ध पीठ है। इसी दरबार में माता सीता ने अपने दोनों पुत्र लव व कुश का मुंडन संस्कार करवाया था। इसी मान्यता को मानते हुए लोग आसपास के जिलों से अपने बच्चों को मुंडन संस्कार करवाने आया करते थे। लेकिन इस बार बाहर से आने वाले भक्तों की संख्या न के बराबर ही रह गई है। बस स्थानीय ही भक्त माता के दर्शन व मुंडन संस्कार के लिए आ रहे है। भक्तों का ज्यादा संख्या में न पहुंचने का मुख्य कारण कोरोना महामारी है। साथ ही उनका कहना है कि हम माता तपेश्वरी जी से ये ही प्रार्थना करते हैं कि इस कोरोना रूपी दानव से पूरे संसार को मुक्ति दे।
