कानपुर । कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में निजी अस्पतालों की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। कानपुर के हैलट अस्पताल में दो दिन पहले मर चुकी महिला का अंतिम संस्कार होने के बाद भी उसका ऑक्सीजन लेवल और बाकी डिटेल अस्पताल प्रबंधन तीमारदार के मोबाइल पर भेजता रहा। दरअसल, कानपुर के गीता नगर की रहने वाली बुजुर्ग प्रियदर्शनी कोरोना संक्रमित हो गयी थीं। इसके बाद 13 मई को उन्हें इलाज के लिए हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद से परिजनों को एक बार भी उनका हाल नहीं बताया गया। परिजनों का आरोपी है कि बुजुर्ग प्रियदर्शनी शुक्ला को वेंटिलेटर की जरूरत थी और उनकी हालत लगातार खराब हो रही थी, लेकिन वह साधारण ऑक्सीजन बेड पर ही रखी गई। इसके चलते 16 मई को उनकी मौत हो गई। वहीं 18 मई तक उनके परिजनों को उनकी हालत की जानकारी भेजी जाती रही, जिसमें उनका ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट बताया जाता रहा था। मृतका की बहू प्राची शुक्ला का कहना है सास को हैलट में सही इलाज नहीं मिला। इसके चलते उनकी मौत हो गई। लेकिन, चौंकाने वाली बात तो यह है कि अंतिम संस्कार होने के बाद भी उनका ऑक्सीजन लेवल मोबाइल पर मैसेज भेजा जा रहा था। इसके चलते उन्होंने हैलट अस्पताल की व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े किए। मरीज की मौत के बाद उसकी तबीयत की जानकारी का मैसेज भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया। आनन फानन में लापरवाही की जांच के लिए कमेटी की गठन भी कर दिया गया।
इस बारे में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिन्सिपल डॉ आरबी कमल ने कहा कि गलती महिला जब भर्ती हुई तो उसकी हालत गम्भीर थी। नियमों के मुताबिक डेथ सार्टिफिकेट जारी किया गया। फिलहाल अब लापरवाही की जांच के लिए कमेटी गठित की गयी है।
कानपुर : निजी अस्पताल ने की लापरवाही की हद पार, मौत के दो दिन बाद तक दी ऑक्सीजन लेवल की अपडेट
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