Monday, March 23, 2026
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कानपुर देहात : परौंख के ‘राम’ दोबारा बनें राष्ट्रपति, यही है कामना!

  संभव बनाने के लिए गांव में शुरू हुआ मन्नतों का दौर
अवनीश अवस्थी/अजय सिंह 

 कानपुर देहात (हि.स.)। कानपुर देहात के छोटे से गांव परौंख में जन्मे रामनाथ कोविंद को आज से चार साल पहले एनडीए की ओर से राष्ट्रपति का उम्मीदवार  बनाया गया था। उस समय गांव वाले ही नहीं, पूरे  प्रदेश के लोग कभी इस बात की कल्पना भी नहीं किये थे। उस दौरान गांव के लोगों से जब मीडियाकर्मी बात करते थे तो उनके चेहरों पर साफ दिखता था कि दिन में खुशी का सपना देख रहे हैं।  ठीक चार साल बाद जब मीडियाकर्मी राष्ट्रपति के आगमन पर उनके  गांव पहुंचे तो गांव के लोग एक बार फिर सपना देखने लगे कि गांव के ‘राम’ ​दोबारा राष्ट्रपति बनेंगे। इस सपने को उस समय और बल मिला, जब दो दिन पहले दिल्ली से कानपुर नगर जाते समय राष्ट्रपति ने झींझक स्टेशन पर अपने गांव के साथ आसपास के ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश से राष्ट्रपति बनने का रास्ता खुल गया है।देश के राष्ट्रपति बनने के बाद रामनाथ कोविंद शुक्रवार को छठवीं बार अपनी शैक्षणिक स्थली कानपुर नगर आये। इस बार उन्होंने अपने दौरे को हवाई यात्रा की जगह ट्रेन से करना सुनिश्चित किया। चार दिवसीय इस यात्रा में यह भी सुनिश्चित किये कि अबकी बार अपने पैतृक गांव परौंख जाना है।  तय हुआ कि  ट्रेन से जाते समय अपने गांव के नजदीक झींझक और रुरा स्टेशन पर अपने चहेतों से मिलना भी है। राष्ट्रपति की इच्छा के अनुसार ऐसा ही हुआ और शुक्रवार को प्रेसीडेंशियल महाराजा ट्रेन से उन्होंने यात्रा की। परौंख आने की जानकारी पर करीब दो सप्ताह से गांव वालों में खुशी का ठिकाना नहीं है। राष्ट्रपति के आने की खबर पर व प्रशासन की ओर से कराई जा रही व्यवस्थाओं को देखते हुए ग्रामीणों के मन  में अनायास आने लगा कि परौंख के राम यानी रामनाथ कोविंद दोबारा राष्ट्रपति बन जायें। हालांकि यह असंभव सा लगता है। देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद जो बिहार से आते थे, उनको छोड़कर कोई भी दोबारा राष्ट्रपति नहीं बना, लेकिन राजनीति में सब कुछ संभव है। ग्रामीणों के इस सपने को उस समय पंख लग गये, जब दो दिन पहले झींझक स्टेशन पर अपनों के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यह कह दिया कि आपके आर्शीवाद से राष्ट्रपति बना। यह भी कहा कि अब उत्तर प्रदेश से राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया है। जरूरत इस बात की है कि आप अपने को कहां तक ले जा पाते हैं। राष्ट्रपति का यह बयान हालांकि राजनीतिक नहीं है और राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरुप भी है। फिर भी गांव वालों को यह लगने लगा कि हमारे ‘राम’ दोबारा राष्ट्रपति बनेंगे। इसको लेकर ग्रामीणों में अभी से मन्नतों का दौर शुरू हो गया है और आज से चार वर्ष पहले की भांति सभी दिन में सपना देख रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि देश की राजनीतिक परिस्थितियों में हमारे राम फिट बैठते हैं और हमारी मन्नतों से असंभव संभव में बदल जाएगा।ग्रामीणों का कहना है
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बालसखा व सेवानिवृत्त शिक्षक राजकिशोर सिंह को जब से जानकारी हुई कि बालसखा गांव आ रहे हैं तो खुशी से उनकी आंखों से नींद गायब हो गई है। उनके परिजन बताते हैं कि रात में जगकर राष्ट्रपति के साथ जो फोटोज हैं उनको देखते रहते हैं। राजकिशोर सिंह से जब बात की गई तो कहा कि मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है और मेरा बालसखा अपनी माटी पर आ रहा है। उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रपति से उम्र में बड़ा हूं, पर हमारी दोस्ती गांव ही नहीं, आसपास के गावों में मिसाल मानी जाती थी। आगे कहा कि शरीर कमजोर हो गया है, लेकिन जब से बालसखा राष्ट्रपति बने तो प्रफुल्लित मन से छोटा मोटा दर्द समझ में ही नहीं आता। उन्होंने कहा कि मेरी तमन्ना है कि बालसखा एक बार फिर राष्ट्रपति बने। गांव के प्रधान संग्राम सिंह ने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि बाबा दोबारा राष्ट्रपति बन जाये ताकि गांव का और अधिक विकास हो सके। कहा कि गांव के बहुत से लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं। हमें उम्मीद है कि बाबा के दोबारा राष्ट्रपति बनने पर रोजगार के लिए भटक रहे युवाओं को गांव में ही रोजगार मिल जाएगा। 
औद्योगिक इकाइयां लगाने की करेंगे मांगराष्ट्रपति के बड़े भाई रामस्वरूप कोविंद ने बताया कि उनकी भी अपने भाई से मिलने की बहुत इच्छा थी, लेकिन कोविड की वजह से नहीं मिल पाये। अब वो गांव आ रहे हैं, ये बहुत खुशी की बात है और उनके आने से पूरे गांव में खुशी की लहर है। भाई ने गांव आने से पहले बहुत विकास कराया है, लेकिन राष्ट्रपति से मिलकर अब गांव और क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर के लिए औद्योगिक इकाइयां गांव में लगाने की मांग करेंगे। लड़कियों को गांव में ही मिल रही शिक्षा
गांव में बने झलकारी बाई इंटर कालेज के प्रिंसिपल विमल कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि राष्ट्रपति की प्रेरणा से ये स्कूल शुरू किया गया था। उस समय पांच कमरे बने थे। राष्ट्रपति का  गांव में स्कूल खोलने का उद्देश्य ये था कि गांव की लड़कियों को बाहर शिक्षा के लिए न जाना पड़े। आज उनकी प्रेरणा से स्कूल में 12 कमरे बन गए हैं और गांव की लड़कियों को गांव में ही बेहतर शिक्षा मिल रही है।

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