Wednesday, April 8, 2026
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कानपुर : डफरिन में डॉक्टरों का अकाल, मरीज हुए बेहाल

– सिर्फ तीन दिन हो रहा अल्ट्रासाउंड

कानपुर (हि.स.)। शासन के मंशानुरुप स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाये जाने को लेकर जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में सारी सुविधाएं प्रदान की जा रही है। लेकिन इन दिनों इस अस्पताल में डॉक्टरों का अकाल पड़ा हुआ है। यहां आने वाली गर्भवती व महिलाओं को इलाज मुहैया नहीं हो पा रहा है, जिससे उनका हाल बेहाल है। डॉक्टरों की कमी को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को भी पत्र लिखा है।

जिला महिला चिकित्सालय में रोजाना करीब तीन सौ से साढ़े तीन सौ नये मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है। कुछ पुराने मरीज भी आते हैं। अस्पताल में मरीज इस उम्मीद से आता है कि उन्हें इलाज मिलेगा, लेकिन यहां लम्बी-लम्बी लाइन में लगने के बाद मायूस होकर वापस चले जाते हैं। साढ़े तीन सौ मरीजों में कभी तीन तो कभी दो डॉक्टर ही ओपीडी संभाल रहे हैं। जरुरत पड़ने पर यह चिकित्सक ओपीडी छोड़कर इमरजेंसी ड्यूटी में भी जाती हैं। ऐसे में ओपीडी के बाहर लाइन में लगे मरीज व उनके तीमारदार लेटलतीफी को देखकर हंगामा करने लगते हैं। डॉक्टरों की कमी होने के चलते मरीजों को बहुत सारी दिक्कतें उठानी पड़ रही है।

आठ डॉक्टरों के भरोसे चल रहा डफरिन

अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रही डॉ. दरख्शा परवीन ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में सिर्फ आठ डॉक्टर ही बची है। जबकि यहां पर 22 चिकित्सकों की मांग है। इनमें एनेस्थेसिया और रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की सख्त जरुरत है। रेडियोलॉजिस्ट के लिए शासन को भी पत्राचार किया गया है। बताया कि अस्पताल में जो डॉक्टर है उन्हीं से ही ओपीडी, सीजर और इमरजेंसी ड्यूटी करवायी जा रही है।

डॉक्टरों पर बढ़ा काम का लोड

जिला महिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों का कहना है कि उन पर काम को लेकर बहुत ज्यादा लोड है। वो समय से ज्यादा ड्यूटी कर रही है। इसी बीच उन्हे कोर्ट में भी जाना पड़ता है। रोजाना करीब 12 से 15 आपरेशन हो रहे हैं। इमरजेंसी और रात्रि ड्यूटी भी कर रही है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक समस्याओं से जूझ रही हैं।

तीन दिन होता है अल्ट्रासाउंड

महिला चिकित्सालय में मरीजों की संख्या देखते हुए रोजाना अल्ट्रासाउंड होना चाहिए। लेकिन यहां पर सिर्फ तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ही अल्ट्रासाउंड की जांच होती है। चिकित्सकों की कमी होने के चलते सिर्फ तीन दिन ही यहां पर जांच की जा रही है। जरुरत पड़ने पर मरीज प्राइवेट लैब से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है, जिसकी कीमत छह सौ से दो हजार रुपये चुकानी पड़ती है। इसको लेकर जब प्रबंधन से पूछा गया तो डॉ. परवीन ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।

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